ड्रग कंट्रोलर से पास दवा को सरकार कैसे प्रतिबंधित कर सकती है, यह सवाल बुधवार को हाईकोर्ट ने दवा कंपनियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उठाया। सरकार ने कहा स्वीकृत का मतलब प्रतिबंध लगाने से रोक नहीं है।
हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की स्वीकृति को पूरी तरह कैसे नकारा जा सकता है। सरकार को यह बताना होगा कि डीसीजीआई की स्वीकृति के बाद नीति में क्या बदलाव हुए हैं अन्यथा आज एक पैनल है तो कल दूसरा पैनल होगा।
जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार की रिपोर्ट से ऐसे किसी कारण का खुलासा नहीं हुआ जिसके कारण स्वीकृत दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। दवा कंपनियों ने 180 याचिका दायर कर सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी है जिसके 344 फिक्स्ड डॉज कांबीनेशन (एफडीसी) पर प्रतिबंध लगा दिया था।
केंद्र सरकार के वकील एएसजी संजय जैन ने कहा कि कानून के मुताबिक डीसीजीआई की किसी भी स्वीकृति को सरकार रद्द कर सकती है। केंद्र सरकार ने कहा कि एक्ट के मुताबिक स्वीकृति मिलने का मतलब सरकार को कार्रवाई से रोकना नहीं है। इससे पहले भी डीसीजीआई की 90 स्वीकृतियों को प्रतिबंधित किया गया था।
देश की कई बड़ी दवा कंपनियों ने कोर्ट को बताया कि इस कानून की धारा 26 ए के अंतर्गत तीन तरह की नुकसान दायक दवाओं की श्रेणी बताई गई है। सरकार के मुताबिक जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है वह तीसरी श्रेणी में आती हैं। इसलिए सरकार को यह बताना चाहिए कि इन एफडीसी में कौन सी दवा या कांबीनेशन गैर जरूरी है।