डीजी (जेल) के तहत गठित समिति जैमिंग समाधान तलाशेगी। समिति पता लगाएंगी कि जेल परिसर में इनकमिंग, आउटगोइंग कॉल, एसएमएस और डाटा सेवाओं को कैसे अवरुद्ध किया जाए।
जेल में कैदी अब मोबाइल से बातचीत नहीं कर पाएंगे। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जेलों में अवैध टेलीफोन संचार के मुद्दे का समाधान तलाशने के लिए उच्चस्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दी है। एक माह में समिति को सिफारिशें देने को कहा है।
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डीजी (जेल) के तहत गठित समिति जैमिंग समाधान तलाशेगी। समिति पता लगाएंगी कि जेल परिसर में इनकमिंग, आउटगोइंग कॉल, एसएमएस और डाटा सेवाओं को कैसे अवरुद्ध किया जाए। दरअसल, 2008-2012 के बीच तिहाड़ और रोहिणी जेल में 31 मोबाइल जैमर लगे थे। ये जैमर 2जी और 3जी मोबाइल सिग्नल को ब्लॉक करने में प्रभावी थे, लेकिन अब 4जी सेवाएं चलती हैं। ऐसे में जैमर मोबाइल सिग्नल को ब्लॉक करने में अप्रभावी हैं।
हालांकि, 2जी, 3जी और 4जी सिग्नल को ब्लॉक करने के लिए हार्मोनियस कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम (एचसीबीएस) का सहारा लिया गया था। 5जी के लिए जेल परिसर में विशेष टावर लगाने की आवश्यकता है। बहुत हद तक एचसीबीएस प्रभावी हुआ, लेकिन पूरी तरीके से यह तकनीक सफल नहीं हो सकी। ये टावर जेलों के आसपास आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों की कॉल और डाटा सेवाओं को प्रभावित करने लगा था।