मसूरी में 17 साल पहले जमीन कब्जा करने के मामले में मुख्य गवाह के बयान बदलने के बावजूद अदालत ने पूर्व विधायक असलम चौधरी सहित चार दोषियों को छह महीने की कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि सभी को अदालत से जमानत मिल गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि शंकर गुप्ता ने चारों दोषियों पर 10500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विज्ञापन
लोक अभियोजक विमलेश कुमारी ने बताया डासना निवासी मंडी समिति के पूर्व चेयरमैन लईक अहमद ने मसूरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लईक ने पुलिस को बताया था कि डासना क्षेत्र में उसका मकान है। सात जनवरी 2006 को पूर्व विधायक असलम अली चौधरी कुछ लोग के साथ आए और उसके मकान की बाउंड्री गिरा दी।
लईक अहमद बीमारी से ग्रस्त होने के कारण चलने फिरने में असमर्थ हैं, जबकि उसके दोनों बेटे भी दिव्यांग होने से देखने और सुनने में असमर्थ हैं। इसका फायदा उठाकर असलम अली चौधरी, हाजी निजाम, शाहिद अली और मुजम्मिल उसकी जमीन पर कब्जा कर उसे बेचना चाहते थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। मामले में मुख्य गवाह वादी लाइक अहमद की पुत्री ने अपने बयान बदल दिया था।