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Delhi: क्या भूमाफिया पर अंकुश के लिए सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते हैं, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Wed, 27 Mar 2024 07:03 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या राजधानी में वन क्षेत्र की जमीन कब्जाने वाले और भूमाफिया से बचाने के लिए किसी तरह के सुरक्षा बल तैनात किए जा सकते हैं? कोर्ट ने यह जवाब उस याचिका पर सुनवाई करते हुए मांगा है जिसमें केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग में पर्याप्त संख्या में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों को तैनात करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

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प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने अपने जवाब में कहा कि वन अधिकारियों को जमीन कब्जाने वालों और माफियाओं से लगातार धमकी मिलती रहती है। इससे निपटने के लिए वन क्षेत्रों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। लेकिन केंद्र के अधिवक्ता ने कहा कि सीआईएसएफ नियम ऐसी तैनाती की अनुमति नहीं देता है। 

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने केंद्र के अधिवक्ता से कहा कि वे संबंधित अधिकारी से पूछकर बताएं कि क्या वन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए किसी अन्य बल को तैनात किया जा सकता है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वन क्षेत्र में भू-माफिया आदि की कोई भी अवैध गतिविधि या अतिक्रमण पर नियंत्रण किया जा सके।  उन्होंने यह निर्देश लेने को कहते हुए सुनवाई मई के लिए स्थगित कर दी।
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अवैध रूप से आईपीएल मैचों की स्ट्रीमिंग करने वाली वेबसाइट पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
हाईकोर्ट ने वायाकॉम 18 की याचिका पर कुछ वेबसाइटों को अवैध रूप से आईपीएल मैचों की स्ट्रीमिंग करने पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने यह देखते हुए आदेश पारित किया कि आईपीएल मैचों की अवधि छोटी होती है और वेबसाइटों तक पहुंच को अवरुद्ध करने में देरी से वायाकॉम 18 को काफी वित्तीय नुकसान हो सकता है।

अदालत ने कहा कि अवैध प्रसारण को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई प्रसारण अधिकारों में वादी के निवेश को संरक्षित करने और कॉपीराइट सुरक्षा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत ने वायाकॉम 18 की ओर से दिए गए नाम वाली वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया, जो गैरकानूनी तरीके से मैचों की स्ट्रीमिंग करती पाई गईं। अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कॉपीराइट कार्यों के लेखकों और मालिकों को कोई अपूरणीय क्षति न हो।

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