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Twitter Blue Tick: ब्लू टिक के लिए हाईकोर्ट गए थे CBI के पूर्व निदेशक, न्यायालय ने कहा- आपके पास बहुत खाली समय

Tue, 17 May 2022 06:37 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय ने सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक की बहाली की मांग वाली याचिका से संबंधित है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को उनके ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक (सत्यापन टैग) की बहाली की मांग वाली याचिका दायर करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा उनके पहले से पारित आदेश के संबंध में बमुश्किल एक महीने बाद ही याची ने पुन: आवेदन दायर कर दिया। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा कि इस मामले में एक पिछला आदेश 7 अप्रैल को पारित किया गया था और कोई औचित्य नहीं था जो वर्तमान याचिका को इतनी जल्दी दायर करें। 

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अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा हमने 7 अप्रैल को एक आदेश पारित किया। आपको तुरंत अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए किसने मजबूर किया? आपके मुवक्किल के पास बहुत खाली समय है। क्या आप हमसे वापसी का उपहार चाहते हैं। राव की ओर से पेश अधिवक्ता राघव अवस्थी ने तर्क दिया कि ट्विटर के साथ उनका अंतिम संचार 18 अप्रैल को हुआ था और उनका सत्यापन अभी तक बहाल नहीं हुआ है। अवस्थी ने अदालत से मामले को उसी मुद्दे से निपटने वाले मामलों से संबंधित याचिका के साथ सुनवाई का आग्रह किया। अदालत ने उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और याचिका को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया।

 

राव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक (सत्यापन टैग) को बहाल करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे मार्च में माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट द्वारा हटा दिया गया था। राव ने पहले भी एक याचिका दायर की थी। हालांकि 7 अप्रैल को कोर्ट ने याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को पहले अपनी शिकायत के साथ ट्विटर से संपर्क करने को कहा था।

 
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याची के अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई मेल लिखे थे, लेकिन उनका सत्यापन टैग बहाल नहीं किया गया है। अपने सत्यापन की बहाली की मांग के अलावा राव ने केंद्र सरकार को मंत्रालय के भीतर एक या एक से अधिक अनुपालन और शिकायत अधिकारियों को नामित करने या निर्धारित करने का निर्देश देने की भी मांग की। अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों (ट्विटर) के पास मामले को निपटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं हो सकता।
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