हाईकोर्ट ने बेसहारा व असहाय के नाम पर एक लंबे अरसे से नाईट शेल्टरों में रह रही महिलाओं का मामला सामने आने पर नाराजगी जताई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन शेल्टरों में मात्र गर्भवती व बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाएं ही रहने व सुविधाओं को पाने की हकदार हैं।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वे स्पष्ट कर देना चाहते है कि उनका आदेश मात्र गर्भवती महिलाओं व उन महिलाओं के लिए है जिनके बच्चे उन पर आश्रित यानि महिलाएं बच्चों को दूध पिला रही है। अदालत ने कहा कि नाईट शेल्टर में महिलाएं एक लंबे अरसे तक रहने या फिर उसे स्थाई ठिकाना बनाने की हकदार नहीं है।
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इससे पूर्व दिल्ली सरकार की अधिवक्ता ने बताया कि इस नाईट शैल्टर में काफी महिलाएं ऐसी है जो स्थाई रूप से रह रही है जबकि शेल्टरों का निर्माण बेसहारा व सहाय महिलाओं को सर्दी से बचाने के लिए किया गया था।
उन्होंने कहा कि काफी महिलाएं ऐसी है जो दूसरे राज्यों से आकर स्थाई रूप से वहां रहने लगी है और वहां से बाहर निकालने के प्रयास के बाद हंगामा करती है।
उन्होंने अदालत से गर्भवती महिलाओं के लिए उक्त शैल्टर को बनाने व महिलाओं को सुविधाएं देने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ के लोग भी वहीं रहने लगे है और कोई काम नहीं करते।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नाईट शैल्टर को स्थाई रहने का ठिकाना व वहीं उसे पते पर पहचान पत्र बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तय की है।