दिल्ली हाईकोर्ट ने साउथ एक्स पार्ट-दो व किदवई नगर में विकास के नाम पर हो रहे व्यावसायिक निर्माण पर काम के दौरान लोगों के स्वास्थ्य व स्वच्छता की अनदेखी करने पर सरकारी एजेंसियों को फटकार लगाई है।
अदालत ने उपराज्यपाल को सभी एजेंसियों के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित करके इन तथ्यों पर विचार करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वर्तमान में पूरा ढांचा टूट रहा है और परियोजना में बाबू मात्र खिड़कियों व सीढ़ियों के आकार को देखते हैं। कोई भी क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य व स्वच्छता पर चिंतित नहीं है।
वे मात्र योजना के संबंध में जानना चाहते हैं कि उसे किस आधार पर पास किया गया। कोई भी जनहित के संबंध में विचार नहीं कर रहा जबकि आप सभी को समाज के हर वर्ग के लोगों की समस्याओं पर विचार करना होगा। अदालत वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याची ने व्यावसायिक निर्माण व पुनर्विकास परियोजना के नाम पर रिहायशी क्षेत्र का नक्शा बदलने का आरोप लगाया है। अदालत ने कहा कि उपराज्यपाल तय करें कि आम लोगों के जीवन के लिए यह जरूरी है या नहीं।