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हरियाणा में सबका खेल बिगाड़ सकता है ये कद्दावर

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एनआईटी विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर नेता का एक निर्णय विधानसभा चुनाव में कई पार्टियों के समीकरण को बिगाड़ सकता है। वर्ष-2009 में कांग्रेस से बागी होने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा के चरण इस बार किस पार्टी में पड़ेंगे इसका शहरवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान उतार चढ़ाव के बाद चुनाव से ऐन पहले नेता का नाम कई पार्टियों के साथ जोड़ा जाने लगा है। जबकि खुद नेता जी चुनाव से डेढ़ महीने पहले तक पार्टी के चयन और निर्दलीय मैदान में आने को लेकर असमंजस में हैं। उनके घर में रोजाना सियासी नफे-नुकसान का गणित लगाया जा रहा है।

कुछ लोगों का कहना है कि वह अपने पत्ते जान बूझकर नहीं खोल रहे। उनके बेटे नीरज शर्मा ने भाजपा का दामन थाम लिया है इसलिए तस्वीर पहले से ही साफ हो गई है। बस घोषणा होनी बाकी है।
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जमीनी नेता होने के कारण हुड्डा सरकार के श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शिवचरण लाल शर्मा के समर्थकों ने उन्हें किसी भी पार्टी का दामन थामने की खुली छूट दी हुई है। शर्मा का कहना है कि एक बार वे समर्थकों की राय ले चुके हैं और जल्दी ही एक और बैठक करने वाले हैं।

उसमें तय कर देंगे कि वह किसी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे या फिर आजाद। बता दें कि अक्तूबर में चुनाव होने वाला है और ठीक कुछ महीने पहले उनका नाम बीजेपी, इनेलो, बसपा से जोड़ा जाने लगा है। अब देखना ये है कि नेता जी चुप्पी कब तोड़ते हैं।
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कांग्रेस का एक और मजबू‌त चेहरा BJP में

कांग्रेस की मजबूत नेत्री व बल्लभगढ़ से लगातार 10 साल तक विधायक रहीं शारदा राठौर के भाजपा का दामन थामने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

शारदा पिछले पांच वर्ष से मुख्य संसदीय सचिव भी हैं। उनके पार्टी छोड़ने से हुड्डा सरकार को बड़ा झटका लगेगा। हालांकि अभी न तो नेता और न ही पार्टी ही इस खबर पर मुहर लगा रहे हैं मगर खबरियों के मुताबिक भाजपा ने बल्लभगढ़ से शारदा राठौर को टिकट देने का निर्णय लिया है।

हालांकि यहां से भाजपा की टिकट के मुख्य दावेदार मूलचंद शर्मा का कहना है कि शारदा ने 10 साल तक जो घपले-घोटाले किए हैं वह उससे बचने के लिए भाजपा में आना चाहती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें यहां से टिकट दिया जाएगा।
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