मूल रूप से फिरोजपुर झिरका के भादस गांव के रहने वाले मामन खा के पिता वक्फ बोर्ड में संपदा अधिकारी थे। उनके रसूख के चलते डीएलएफ कंपनी में मामन को नौकरी मिली। नौकरी पर रहने के दौरान पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा था। जिस दौरान उसे अच्छे मत मिले थे।
हालांकि यह चुनाव वह हार गया था। उसके मिलने वाले मतों की अच्छी खासी संख्या को देखकर कांग्रेस ने टिकट दिया था। जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस ने फिर से मामन पर ही दाव लगाया। कांग्रेस में मामन खान अपनी गहरी पैठ बना चुका है। वह राबर्ट वाड्रा का भी काफी करीबी बताया जाता है।
मामन को राजस्थान से किया गिरफ्तार
हरियाणा पुलिस ने फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान को नूंह हिंसा की साजिश रचने के मामले में राजस्थान से गिरफ्तार किया था। एडीजीपी ममता सिंह ने इसकी जानकारी दी थी। हरियाणा सरकार ने नूंह जिले में शुक्रवार यानी 15 सितंबर सुबह 10 बजे से 16 सितंबर की रात 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं।
तीन ही दिनों में कर दी मोनू-मामन की गिरफ्तारी
नूंह हिंसा में माेनू मानेसर का नाम ज्यादा सक्रियता से सामने आया था। ऐसे में पहले उसकी गिरफ्तारी जरूरी थी। दूसरी ओर कहीं नूंह हिंसा का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न फैल जाए, पुलिस को इसका भी ध्यान रखना था। नूंह के तावडू में जी-20 सम्मेलन के कारण सबूत मिलने के बाद भी पुलिस इन दोनों ही मामलों में पूरी तरह से चुप्पी साधे रही।
विशेष बात यह थी कि दोनों ही आरोपी भूमिगत थे, लेकिन पुलिस को उनके पल-पल की जानकारी थी। यही कारण रहा कि 12 सितंबर को जहां पुलिस ने गुरुग्राम के आईएमटी-1 से मोनू मानेसर को धर दबोचा, वहीं उसकी गिरफ्तारी के ठीक तीन दिन बाद भूमिगत हुए विधायक मामन खान को भी जयपुर से गिरफ्तार कर लिया।