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आदेश देने वाले इंस्पेक्टर के खिलाफ भी होगी जांच

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गुरुग्राम। साइबर कैफे संचालक को झूठे मामले में फंसाने व अन्य आरोपों की सुनवाई के बाद दोषी पुलिस कर्मियों के साथ-साथ तत्कालीन अपराध शाखा प्रभारी तथा छापेमारी करने वाले तीन हवलदार भी निशाने पर हैं। अदालत ने बुधवार को प्रदेश सरकार व राज्य चौकसी ब्यूरो के महानिदेशक को दो माह के भीतर जांच कर अदालत में चार्जशीट दाखिल करने को कहा है।
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पीड़ित के वकील विपिन जैन के अनुसार साइबर कैफे की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को भी संज्ञान में लिया है कि अपराध शाखा 46 के तत्कालीन प्रभारी रहे वीर सिंह व छापेमारी में साथ जाने वाले हवलदार जान मित्तर, गुरु सेवक व प्रहलाद के खिलाफ भी जांच हो। तत्कालीन इंस्पेक्टर वीर सिंह इस समय एसीपी पटौदी के पद पर तैनात हैं। जबकि अन्य हवलदार एएसआई के पद पर तैनात हैं।
सीडी में नजर आ रहे हैं तीनों हवलदार
अदालत की ओर से देखी गई सीडी में हवलदार जान मित्तर, गुरु सेवक व प्रहलाद भी दिख रहे हैं। जांच के दौरान इनका नाम भी शामिल था, मगर पुलिस ने इन तीनों को जांच से निकाल दिया था। इसके साथ ही पीड़ित ने अपने बयान में कई बार कहा है कि प्रभारी इंस्पेक्टर वीर सिंह ने उसे मारा पीटा और पैसे की मांग भी की थी। इसे भी अदालत ने संज्ञान में लिया है।
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परिवार वालों की प्रेरणा से लड़ी है लड़ाई
कैफे संचालक हंसराज राठी ने बताया कि वह सेना में दस साल नौकरी कर चुका है। उसके परिवार के लोग सेना में हैं। पुलिस की ओर से जबरन परेशान किए जाने के कारण उसने इनके खिलाफ संघर्ष किया है। मुकदमे की पैरवी में बहुत परेशानी आती थी मगर परिवार वालों ने इस मामले में उसे पूरा सपोर्ट किया। उनके सपोर्ट करने के कारण ही वह आज लड़ रहा है।
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