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रोज गुजरती हैं 80 से अधिक सुपरफास्ट: ट्रेन से उतरते ही निगाहें तलाशती हैं कुली, फिर खुद उठाना पड़ता है सामान

Thu, 03 Oct 2024 07:19 PM IST
Vikas Kumar रोहन, अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

गुड़गांव रेलवे स्टेशन को 1873 में अंग्रेजी सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था। अंग्रेजों ने दिल्ली से गुड़गांव के रास्ते फर्रुखनगर तक नमक की सप्लाई करने के लिए इस रूट पर रेलवे लाइन बिछाई थी। 14 फरवरी 1873 में इस रूट पर पहली रेल चली थी।
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गुड़गांव रेलवे स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कुली...ए कुली। सफर के दौरान रेल यात्री रेलवे स्टेशन पर जाने या रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने के लिए कुली को बुलाते हैं। कुली आता है और भारी सामान के साथ आने वाले यात्रियों के सफर को आसान कर देता है। किसी भी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन पर कुली मिलना आम बात है, लेकिन हरियाणा की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गुड़गांव रेलवे स्टेशन पर ऐसा नहीं है। इस स्टेशन पर आवागमन करने वाले रेल यात्रियों की निगाहें कुली को तलाशती तो हैं, मगर वह दूर तक कहीं नजर नहीं आता। बात दरअसल यह है कि करीब 150 साल पुराने इस स्टेशन पर कुली है ही नहीं। ऐसे में यात्रियों को खुद ही अपनी सामान उठाना पड़ता है।

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गुड़गांव रेलवे स्टेशन को 1873 में अंग्रेजी सरकार के कार्यकाल में बनाया गया था। अंग्रेजों ने दिल्ली से गुड़गांव के रास्ते फर्रुखनगर तक नमक की सप्लाई करने के लिए इस रूट पर रेलवे लाइन बिछाई थी। 14 फरवरी 1873 में इस रूट पर पहली रेल चली थी। बाद में इसे रेवाड़ी रूट पर भी शुरू कर दिया गया था। आजादी के बाद इस रेलवे का यह रूट महत्वपूर्ण हो गया। दक्षिण-पश्चिम की लंबी दूरी की कई ट्रेनों का संचालन यहां से होने लगा। मौजूदा समय में गुड़गांव स्टेशन से राजस्थान, गुजरात के कई शहरों के लिए ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अलावा यहां से उत्तर भारत के हिमालय में जम्मू-कश्मीर तक की ट्रेनों का आवागमन होता है। मौजूदा समय में यहां से प्रतिदिन करीब 80 सुपरफास्ट ट्रेनें गुजरती हैं। गुड़गांव से राजधानी, डबल डेकर, शताब्दी व अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों में चढ़ने वाले यात्रियों की संख्या भी प्रतिदिन लगभग 30 हजार है। इसके बावजूद भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन पर अपना सामान खुद ही उठाना पड़ता है।

मॉडल स्टेशन बनाने की है तैयारी
गुड़गांव लवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन बनाए जाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके बावजूद इस स्टेशन पर यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी किसी कुली का न होना है। भारी सामान अगर किसी यात्री के पास है तो उसकी आफत पक्की है। भारी सामान के साथ यात्रियों का ट्रेन से उतरना और चढ़ना दोनों ही जैसे आफत का काम है। उस पर अगर इन भारी सामान वाले यात्रियों को फुटओवर ब्रिज का सहारा लेकर एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाना पड़ जाए तो समझो जैसे उनकी आफत ही आ गई।

कब से नहीं हैं कुली, रेलवे अधिकारियों को भी नहीं पता
गुड़गांव स्टेशन पर कुली की सुविधा क्या कभी थी भी या नहीं। इसका जवाब स्थानीय रेल अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि निश्चित तौर पर कुछ पता नहीं चलता कि आखिर कभी स्टेशन पर कुली थे या नहीं। फिलहाल इतना जरूर है कि विगत करीब तीस साल से यहां कोई कुली नहीं है। आने वाले समय में भी कुली की सुविधा स्टेशन पर कब उपलब्ध होगी, यह भी निश्चित नहीं है।
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कई बार भेजी गई है कुली की डिमांड
दैनिक यात्री संघ के अध्यक्ष योगेंद्र कहते हैं कि गुड़गांव स्टेशन पर कुली की बहुत आवश्यकता है। इसके लिए कई बार रेलवे अधिकारियों से मांग की जा चुकी है। यात्री संघ अब इस संबंध में फिर से अधिकारियों से बात करेगा। शुरूआती दौर में कम से कम पांच कुली ही स्टेशन पर उपलब्ध करा दिए जाएं तो यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। दूसरी ओर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कुली की डिमांड उच्चाधिकारियों तक कई बार भेजी जा चुकी है। इस पर उच्चाधिकारियों को ही निर्णय लेना है।
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