सोहना। वन विभाग की ओर से अरावली में अवैध कब्जों का सर्वे कराकर दिए गए नोटिस के खिलाफ सोहना निवासी एकजुट होते दिख रहे हैं। बैठकों, पंचायतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक अपनी गुहार लगा चुके लोग अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दरबार में अपनी अर्जी लेकर पहुंच गए हैं। स्थानीय विधायक संजय सिंह की अगुआई में व्यापार मंडल संघ ने लोगों के प्रतिनिधि के तौर पर मुख्यमंत्री से उनके चंडीगढ़ कार्यालय में मिल दया याचिका सौंपी। हजारों लोगों की ओर से हस्ताक्षरयुक्त इस दया याचिका में मुख्यमंत्री से अपने आशियाने बचाने की गुहार लगाई गई है।
वन विभाग की ओर से पीएलपीए, एफसीए-1980 व भारतीय वन अधिनियम 1927 की उल्लंघना बताकर कई वर्ष पुराने लाल डोरा आबादी क्षेत्र पहाड़ कॉलोनी, आईटीआई कॉलोनी, पीर कॉलोनी, बनियावाडा, ठाकुरवाड़ा, गुर्जर घाटी मे बने मकानों को खाली करने का नोटिस देने के बाद से व उन्हें तोड़ने बाबत लिखित नोटिस मकान मालिकों को दिया है, जिसमें केवल सात दिनों के भीतर जगह छोड़ने के आदेश जारी किए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद से यहां के स्थानीय निवासियों में आशियाना उजड़ने का भय बना हुआ है।
इसी संदर्भ मे सोहना तावडू के विधायक संजय सिंह के नेतृत्व में व्यापार मंडल संघ प्रधान मनोज राघव (बजरंगी), अग्रवाल सभा के पूर्व प्रधान विजय अग्रवाल, पूर्व उप प्रधान पंकज सिंगला, खटाना, राजेश खुराना ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की और सोहना शहरवासियों की ओर से एक दया याचिका मुख्यमंत्री को सौंपी, जिसमें बताया कि वन विभाग की कार्रवाई को रोकने व नगर परिषद सोहना के नाम दर्ज देह शामलात जमीन में से कुछ जमीन वन विभाग को देने का आग्रह किया। वहीं कुछ मकानों के पुराने दस्तावेज भी संलग्न किए। बजरंगी ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री ने बातों को गंभीरता से सुना व आश्वासन भी दिया कि इस विषय में सरकार से जो मदद जनता की हो सकेगी वो जरूर की जाएगी। जमीन ट्रांसफर के लिए भी सरकार को माननीय अदालत को बताना होगा, उसके बाद ही वन विभाग को जमीन ट्रांसफर की जा सकती है। मुख्यमंत्री माननीय मनोहर लाल ने वन विभाग के निदेशक को फोन कर इस मामले को गंभीरता व तत्परता से सुलझाने के लिए कहा।
बजरंगी ने बताया कि सभी के सहयोग व विधायक कंवर संजय सिंह के सार्थक प्रयासों व मुख्यमंत्री के आश्वासन देने के बाद आशियाना न उजड़ने देने की मुहिम जरूर कामयाब होती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि जिसके पास वन विभाग का नोटिस आया है वह इसका लिखित जवाब मय कागजात, जो जैसा जिसके पास है, के साथ नोटिस का लिखित जवाब वन विभाग को जरूर दे ताकि हमारा पक्ष और मजबूत हो सके।