आरोप है कि इस बीच उन्हें पास के ही अन्य कंटेनर से आवाजें आई तो वह बाहर निकली। एक व्यक्ति उस कंटेनर के बाहर खड़ा था और एक व्यक्ति सीढि़यों से उतर रहा था। टीम की सदस्या ने जब उस व्यक्ति से पूछताछ की तो उसने कुछ भी नहीं बताया। इसी दौरान एक और व्यक्ति उस कंटेनर से बाहर निकला, उसने कुछ छुपा भी रखा था। जिस पर टीम की सदस्या महिला ने उसको पकड़ लिया। आरोपी हाथ छुड़ाकर भागने लगा तो महिला ने शोर मचा दिया। इसके बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने दो लोगों को पकड़ लिया, जबकि उनका तीसरा साथी भाग निकला।
पकड़े गए दोनों लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया। पुलिस ने दोनों से आई कार्ड मांगा तो वह दिखा नहीं सके। सीआरपीएफ कमांडर मनोज यादव भी मौके पर ही थे। मामला चूंकि राहुल गांधी की सुरक्षा और जासूसी से जुड़ा था। ऐसे में पुलिस दोनों व्यक्तियों को अपने साथ थाने ले गई। बाद में उनके तीसरे साथी को भी पकड़ लिया गया। पूछताछ में पता चला कि हिरासत में लिए गए तीनों आरोपी पुलिसकर्मी ही हैं। वह सीआरपीएफ जवान की अनुमति के बाद ही कैंप में दाखिल हुए थे। फिलहाल पुलिस ने तीनों को छोड़ दिया है। हालांकि अधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हैं।
यह एक गलतफहमी है। पुलिस के तीन आदमी कैंप में दाखिल हुए थे। सीआरपीएफ की अनुमति से ही वह अंदर गए थे। चूंकि वह सिविल में थे। ऐसे में शिविर के कुछ लोगों ने समझा कि वह घुसपैठिए थे। हम मामले की जांच कर रहे हैं।
- कला रामचंद्रन, पुलिस आयुक्त गुरुग्राम