फर्जी मार्कशीट मामले में करहेड़ा के सरपंच रामपाल की मुश्किलें बढ़ीमाननीय उच्च न्यायालय ने याचिका की खारिज।संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर झिरका। करहेड़ा के सरपंच रामपाल की फर्जी मार्कशीट का मामला एसडीएम कार्यालय फिरोजपुर झिरका में विचाराधीन था। जिसको अपने पक्ष में करने की एवज में सरपंच पक्ष द्वारा कार्यालय में तैनात किसी कर्मचारी के माध्यम से अधिकारी से साठ गांठ की गई। जिसके चलते सरपंच, पंचायत सचिव के माध्यम से एसडीएम कार्यालय के एक पूर्व कर्मचारी के संपर्क में था। यह रिश्वत की राशि किसी बड़े अधिकारी को जानी थी। लेकिन इससे पहले ही एसीबी गुरुग्राम की टीम ने पंचायत सचिव हसीन को 6 फरवरी को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। आरोपी हसीन को एक दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया, माननीय अदालत ने हसीन को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सचिव हसीन अब जमानत पर है।
इसी संदर्भ में तत्कालीन उपमंडल अधिकारी नागरिक के स्टेनो प्रदीप और हसीन की चैट और कुछ जरूरी कागजात मिले, जिसको लेकर इस मामले में स्टेनो प्रदीप को सहआरोपी बनाया, जिसे पकड़ने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो लगातार दबिश दे रही है। इसी दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रदीप स्टेनो पर 10 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया। स्टेनो प्रदीप उक्त अधिकारी के बीच में एक कड़ी का काम करता था। इसी बीच स्टेनो प्रदीप ने जमानत के लिए माननीय उच्च न्यायालय में याचिका डाली, माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पहले पुलिस की जांच में शामिल हो।
इसी कड़ी में करहेड़ा के सरपंच रामपाल ने एंटी करप्शन ब्यूरो और जुबेर अहमद को लेकर एक याचिका माननीय उच्च न्यायालय में डाली। याचिका में सरपंच ने लिखा कि पंचायत सचिव हसीन को एंटी करप्शन ब्यूरो और जुबेर अहमद ने मिलकर फंसाया है और मुझे जाति सूचक शब्द कहकर अपने घर से भगा दिया। याचिका पर सुनवाई करते हुए 18 अगस्त 2025 को माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के सभी आरोपों को खारिज करते हुए रामपाल की अग्रिम जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है।