गुरुग्राम। सेक्टर-29 के लेजरवैली मैदान में लगा सरस मेला महिला आत्मनिर्भरता की कहानी बयां कर रहा है। यहां अधिकांश स्टॉल पर महिलाएं अपने हस्तशिल्प के सामान की बिक्री कर रही हैं। इनमें भागलपुर का सिल्क बेचने वाली शमीमा खातून हों, भूूना (फतेहाबाद) की गीता देवी के शहर की मिठास हो या फिर गुरुग्राम की राजबाला के हाथ से निर्मित खिलौने हों। इनके अलावा भी बहुत से ऐसे आइटम हैं, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से आयोजित इस मेले का मुख्य मकसद भी ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित और आत्मनिर्भर कर उन्हें आर्थिक उन्नति प्रदान करना है। ग्रामीण विकास विभाग की मुख्य कार्यकारी अनु श्योकंद के अनुसार गुरुग्राम में महिलाओं के 12 से अधिक स्वयं सहायता समूह, जो आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। इन समूह से जुड़कर महिलाएं अपने आप को स्वावलंबी बना रही हैं। इनमें अधिकांश आम गृहणियां हैं जो आज उद्यमी बनकर उभर रही हैं। मिशन की जिला प्रबंधक दीप्ति ढींढसा के अनुसार दो साल से कोरोना के कारण गतिविधियों पर विराम सा लगा था। स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यामियों के लिए हस्तशिल्प मेला सबसे बड़ा बाजार होता है। 2020 से ऐसे मेलों का आयोजन नहीं हुआ। दो साल में कुरुक्षेत्र गीता जयंती और नोएडा में दो ही मेले लगे। यह तीसरा अवसर है तो एक खुले बाजार के रूप में महिलाओं को अपने हाथों से निर्मित उत्पाद की बिक्री करने का अवसर मिला है। मेले में 150 से अधिक स्टॉल हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश पर महिलाओं के उत्पाद हैं। महिलाओं के हाथों से निर्मित उत्पादों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। निश्चित ही यह मेला महिलाओं को आत्मनिर्भर कर उनकी आर्थिक उन्नति में मील का पत्थर साबित होगा। सरस मेले का आगाज 9 अप्रैल को हुआ था, जो 20 तक चलेगा। इसमें हाथ से निर्मित दैनिक जीवन में इस्तेमाल की वस्तुओं से लेकर घर की साज सज्जा तक का सामान आसानी से खरीदा जा सकता है।