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Gurugram News: पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर रहे विधायक के मोबाइल-लैपटॉप की जांच

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संवाद न्यूज एजेंसी
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नूंह। पुलिस गिरफ्त में आए फिरोजपुर झिरका के विधायक मामन खान से पुलिस पूछताछ जारी है। पुलिस ने मामन के मोबाइल और लैपटॉप को अपने कब्जे में ले लिया है। जिससे अब इनके जरिए पुलिस हिंसा के सच तक पहुंचने की कवायद में जुट गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि लैपटॉप और मोबाइल से काफी फोटो और वीडियो डिलीट की गई हैं। पुलिस साइबर एक्सपर्ट की मदद से डिलीट हुई इन फोटो और वीडियो को रिकवर करने का प्रयास कर रही है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल से कई अहम सुराग लगने की उम्मीद है। इसलिए एक्सपर्ट्स से उसकी जांच कराई जा रही है । पुलिस मामन के मोबाइल से हुई बातचीत व चैट्स को आधार मानकर इस मामले में आगे बढ़ रही है । अभी तक कई अहम चीजें पुलिस के हाथ ऐसी लगी है जो मामन की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। इतना ही नहीं जो लोग उनके संपर्क में उस दौरान आए हैं पुलिस उनसे भी पूछताछ करेगी।
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पुलिस सूत्रों ने बताया मामन खान इस मामले में उलझ गए हैं और उनका बाहर निकलना अब इतना आसान नहीं होगा। क्योंकि उनके कुछ समर्थकों ने ही कड़ी पूछताछ में विधायक को ही बड़कली चौक पर हुई हिंसा के मामले में दिशा निर्देशक बताया है। चर्चा रही कि मामन खान को पूछताछ के लिए नगीना थाना व घटना स्थल पर लाया गया है लेकिन ऐसा दिखाई नहीं दिया ।


हर जगह रही शांति :

सुरक्षा की दृष्टि से भले ही पुलिस ने जिला मुख्यालय पर भारी पुलिस बल तैनात किया हो, लेकिन सूत्रों का कहना है मामन की गिरफ्तारी के बाद कोई भी खुलकर बोलने से बच रहा है। लोगों का कहना है अब वह किसी ऐसे झमेले में नहीं पड़ेंगे, जिससे उन्हें दिक्कत हो। पुलिस भले ही किसी को गिरफ्तार करें, उन्हें कोई लेना देना नहीं है । जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा।
यही कारण रहा की बृहस्पतिवार को मामन की गिरफ्तारी के बाद कहीं भी किसी प्रकार की कोई बयानबाजी या फिर विरोध नहीं हुआ। लोगों को यह समझ आ गया की पुलिस ने जब विधायक को ही नहीं बख्शा तो आम आदमी की क्या बिसात।

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मोनू, मामन व बिट्टू की बयानबाजी ने वर्षों पीछे धकेल दिया इलाका


हीरो बनने के चक्कर में हिंसा को दे दिया जन्म

अब इलाके के लोगों को भुगतना पड़ रहा दंश


शेरसिंह डागर
नूंह। मोनू मानेसर, विधायक मामन खान व बिट्टू बजरंगी की बयानबाजी व सरकार के फेलियर ने नूंह जिले को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भरने में अभी काफी वक्त लगेगा। इन लोगों ने हीरो बनने के चक्कर में ऐसी हिंसा को जन्म दिया, जिसने न केवल भाईचारे की मिसाल मेवात के माथे पर कलंक लगा दिया, बल्कि इलाके के विकास को भी वर्षों पीछे धकेल दिया है।
यह वह कड़वा सच है जिसे हर कोई खुलकर नहीं बोल पा रहा है, लेकिन इस दर्द को वो लोग समझ रहे हैं जो दूसरे राज्यों व जिलों से यहां आकर छोटी-मोटी नौकरी व स्वरोजगार कर अपना व अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। हिंसा के बाद ऐसे लोग वहां दोबारा से अपने काम पर नहीं जा पा रहे हैं। मेवात में ही ऐसे सौ, दो सौ नहीं करीब 10 हजार लोग हैं, जो बाहर के थे और यहां काम करते थे। हिंसा थमने के बाद भी वह अभी तक वापस अपने उसे काम पर नहीं लौटे हैं।
कहीं न कहीं लोग डरे और सहमे हुए हैं। हिंसा का दूसरा पहलू यह भी है जो दूसरे समुदाय के लोग यहां रह रहे हैं वह भी मन में हिंसा के डर को छुपाए हुए हैं और यहां से धीरे धीरे दूसरे शहरों में शिफ्ट होने का मन बना रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि 31 जुलाई को नूंह में जलाभिषेक यात्रा के दौरान हुई हिंसा को रोकने में तत्कालीन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पूरी तरह से फेल रहे। मोनू मानेसर व मामन खान व बिट्टू बजरंगी की बयानबाजी के साथ सोशल मीडिया पर डाली पोस्ट ने नफरत और हिंसा का जो बीज बोया, वह अब इलाके को अब काटना पड़ रहा है।
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जानकारों ने बताया है बड़े-बड़े शहरों में मेवात के जो युवक ड्राइवरी या किसी के घर पर छोटी-मोटी नौकरी करते थे या फिर कोई अन्य स्वरोजगार करते थे। इस हिंसा के कारण वो वहां जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। यहां जमीन के रेट बहुत गिर गए। दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे के साथ औद्योगिक धंधे की नीयत से जो जमीन खरीदी जा रही थी, वो भी बंद हो गई है। एक स्कूल संचालक ने बताया कि कुछ अभिभावकों के सामने काम छूटने कारण स्कूल फीस के भी लाले पड़ रहे हैं।
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