गुरुग्राम। बारिश होने के बाद जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। इनमें ज्यादातर वायरल बुखार और सर्दी, खांसी से पीड़ित हैं। यहां पंजीकरण काउंटर सुबह खुलने से घंटों पहले लोग पहुंच जाते हैं और दोपहर में विंडो बंद होने के बाद तक लाइन में खड़े रहते हैं।
हालांकि, डेंगू और मलेरिया के ज्यादा रोगी नहीं है। अब तक डेंगू के दस और मलेरिया के एक मरीज में पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रोजाना आने वाले कुल मरीजों में से करीब 60-70 फीसदी लोग खांसी, बुखार व गले दर्द की समस्या से पीड़ित हैं जबकि अन्य नाक-कान और हड्डियों के रोगी हैं। सेक्टर-10 स्थित जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में रोजाना औसतन 1900-2000 लोग इलाज के लिए आ रहे हैं।
डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत
ओपीडी की समय सीमा समाप्त होने से एक घंटे पहले ही पंजीकरण काउंटर बंद कर दिए जाते हैं ताकि सभी मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दिया जा सके। नागरिक अस्पताल में शहरी इलाके के साथ ही धनकोट, चौमा, पलड़ा, बादशाहपुर, मानेसर समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग इलाज के लिए आ रहे हैं। यही वजह है कि यहां पर रोजाना ही मरीजों की भारी भीड़ लग रही है। ऐसे में चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाए जाने की दरकार है।
स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की दरकार
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए चौमा से आए राजीव ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)चौमा में भर्ती होकर इलाज कराने की सुविधा नहीं है। यही वजह है कि नागरिक अस्पताल में आना पड़ा। इसी तरह ग्रामीण इलाके के अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे, अल्ट्रासाउंड समेत स्वास्थ्य संबंधी अन्य जांच की सुविधा न होने से भी लोगों को यहीं आना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि पीएचसी पर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएं तो इतनी दूर नहीं आना पड़े।
60 बेड का वार्ड बनाया जा रहा है
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए अब 60 बेड का अलग से वार्ड बनाया जा रहा है। दरअसल, रोजाना ही बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। पिछले दिनों अमर उजाला ने आपातकालीन वार्ड में बेड की कमी के मुद्दे पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन भी अब नए सिरे से अलग ही वार्ड तैयार कर रहा है।
चिकित्सा अधीक्षक का बयान :
अस्पताल में रोजाना मरीज बढ़ रहे हैं चाहें वे सामान्य बीमारी के हों या सीजनल। सभी मरीजों को बेहतर इलाज देना हमारी प्राथमिकता है।
- डॉ. मनीष राठी, चिकित्सा अधीक्षक