चाहल्का ढाणी में चार बच्चों की मौत किन कारणों से हुई ?
पांच दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता।
मोहम्मद शाहिद मेवाती
तावडू। उपमंडल के चाहल्का गांव की ढाणी में दस दिन के अंदर हुई चार बच्चों की मौत का मामला पांच दिन पहले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी यह पता करने में पूरी तरह विफल रही है कि किन कारणों या बीमारी से मासूमों की जान गई थी। जो स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब गोगजाका और डालावास गांव की 14 बच्चियों में गलघोंटू बीमारी के जैसे लक्षण मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थानीय स्वास्थ्य टीम ने टीकाकरण अभियान को और तेज कर दिया है। सभी बच्चियों की जांच कर नमूने लिए गए हैं।
तावडू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रवर चिकित्सा अधिकारी डाॅ. देवेंद्र सोलंकी से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार की दोपहर करीब छह से नौ वर्ष की बीच की 14 बच्चियों में हल्का बुखार व गले में दर्द की शिकायत सामने आई थी। जिनमें सभी के सैंपल लेकर विभाग को भेज दिए गए हैं। वहीं उन्होंने बताया कि चार बच्चों की मौत के मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह गंभीर है। कई टीमें जांच के लिए गठित की गई हैं, जो प्रत्येक दिन गांव और ढाणी में पहुंचकर जांच कर रही हैं। टीम द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया गया है। बच्चों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। स्वास्थ्य टीम द्वारा पीने के पानी का भी नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया है।
बतादें कि शुक्रवार को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डाॅ. डोली की टीम भी गांव पहुंची थी। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा नूंह स्वास्थ्य विभाग से इस सनसनीखेज मामले की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जानकारी ली गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग कहीं न कहीं इस पूरे मामले को दबाने में जुटा हुआ है। मात्र कुछ आशा वर्कर और एएनएम के सहारे ही खानापूर्ति की जा रही है। पीड़ित परिजनों की मांग है कि उनके बच्चे तो चले गए लेकिन स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि अब और किसी बच्चे की जान न जाए। हालांकि बड़े अधिकारी सामने आकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
फोटो:-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तावडू में गलघोटू के लक्षणों के चलते बच्चियों की जांच करते चिकित्सकों की टीम