गुरुग्राम। नारनौल जेल में तैनात जेल उपाधीक्षक कुलदीप हुड्डा ने भ्रष्टाचार के लगे आरोप से तंग आकर बृहस्पतिवार देर शाम जहरीले पदार्थ का सेवन करके आत्महत्या कर ली। शुक्रवार की सुबह उनके परिजन इस बात पर अड़े रहे कि जब तक एसपी नारनौल के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज नहीं होगा, तब तक वह शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। बाद में डीसीपी वेस्ट दीपक सहारण पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उनसे पूरे मामले की जांच एडीजे स्तर के जज से कराने का मांग पत्र लिया। उन्होंने इस मांग पत्र को जांच के लिए उच्च अधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया।
रोहतक के पोलंगी गांव के रहने वाले कुलदीप हुड्डा (45) नारनौल जेल में उपाधीक्षक के पद पर तैनात थे। एक गैंगस्टर के गुर्गे को जेल में सुविधा देने के नाम पर एक लाख रुपये की घूस मांगने के आरोप में नारनौल पुलिस व राज्य चौकसी ब्यूरो की ओर से उनके खिलाफ पिछले साल दिसंबर में मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में उनकी पत्नी नीलम का कहना है कि पति कुलदीप का इससे कोई लेना-देना नहीं था। जिस समय यह मामला उठा था, उस दौरान पति छुट्टी पर थे। जान-बूझकर उनको फंसाया गया था। जिसके बाद से वह मानसिक रूप से परेशान थे। इन दिनों वह अपनी साली के घर राजेन्द्रा पार्क थाना क्षेत्र में माकड़ोला गांव में आए थे। बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत रद्द हो गई थी। उसके बाद उन्होंने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। रिश्तेदारों ने उन्हें उपचार के लिए एसजीटी यूनिर्वसिटी के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उनकी देर शाम मौत हो गई। राजेन्द्रा पार्क थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जांच के लिए भेज दिया है।
बेटा बीटेक फाइनल का छात्र है
कुलदीप के परिजनों ने बताया कि बारह साल की उनकी नौकरी थी। वह सोनीपत, हिसार व नारनौल में तैनात रहे। उनका एक बेटा है, जो बीटेक फाइनल का छात्र है। छोटे भाई मुकेश अध्यापक हैं।
वर्जन
जेल उपाधीक्षक की मौत के मामले में परिजनों की ओर से शिकायत ली गई है। जिसमें परिवार वालों ने पूरे मामले की जांच एडीजे स्तर से कराने की मांग की है।
दीपक सहारण, डीसीपी वेस्ट , गुरुग्राम।