गुरुग्राम। देसां मै देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाणा। यह कहावत अब बीते दिनों की बात हो गई है। हरियाणा के गांवों में भी दूध-दही और घी सहज उपलब्ध नहीं है। इनकी किल्लत होने लगी है। इसका कारण है पशु चारे के दामों में बेतहाशा वृद्धि। पशु चारे के रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला तूड़ा 500 रुपये का 40 किलो (मन) हो गया है। पहले यह 200 रुपये मन था। इसमें एकदम से हुई 300 रुपये की वृद्धि ने पशुपालकों को पशुओं की संख्या कम करने पर मजबूर कर दिया है। घरों से लेकर डेयरी संचालक तक गाय-भैंसों की संख्या घटा रहे हैं। इससे दूध की किल्लत का सामना करना पड़ा रहा है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में दूध के दाम 65 से 70 रुपये लीटर हो गए हैं।
पशु चारे के साथ ही दुधारू पशुओं को पूरक आहर के रूप में खिलाई जाने वाली खल-बिनौला और चूरी भी महंगी हो गई है। पहले आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्र में एक घर में दो भैंस या एक गाय, एक भैंस रखने का प्रचलन था। ऐसा इसलिए कि कहीं कोई दिक्कत हो तो दूध की किल्लत का सामना न करना पड़े। अब ऐसे घरेलू पालक भी एक पशु पाल रहे हैं। डेयरियों में जहां 10 से 15 दुधारू पशु रखे जा रहे थे, वहां चारे की परेशानी के कारण यह संख्या पांच से सात ही रह गई है।
ढाई गुणा बढ़ गए दाम
पशुपालक फूलसिंह के अनुसार साल भर चारे के रूप में तूड़े का प्रयोग ही होता है। इसके दाम ढाई गुणा बढ़ गए। दो पशुओं के लिए सालाना 30 हजार रुपये तक का तूड़ा पर्याप्त था। अब एक के लिए इससे अधिक का तूड़ा चाहिए। ऐसे में उन्होंने पशुओं की संख्या कम करने का फैसला किया है। खल की बोरी 4200 से 5200 रुपये की हो गई। बिनौला 3000 से 4000 रुपये की एक बोरी मिल रही है। चूरी और दूसरे पूरक आहर में 100 रुपये से 1000 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। ऐसे में ज्यादा पशु पालने का सोच भी नहीं सकते।
स्वरोजगार को लगा रहा झटका
डेयरी संचालक ब्रह्म प्रकाश के अनुसार पशु चारा महंगा होने से स्वरोजगार को भी झटका लगा है। पिछले साल जुगाड़बाजी कर डेयरी लगाई थी। ठीक-ठाक कम चल निकला था। इस बार एकदम से तूड़े के भाव ने पशु कम करने पर मजबूर कर दिया। 15 गायें थीं, 7 बेच दीं। अब 8 ही बची हैं। घरों में भी पशुओं की संख्या कम हो गई। 80 प्रतिशत फैट का दूध 65 रुपये तो 100 फीसदी फैट वाला दूध 80 रुपये किलो मिल रहा है। अब उसे आगे किस भाव में बेचें। काम बंद करने को मजबूर हूं।
पशुओं के पूरक आहर की बात करें तो 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी हर प्रकार की वस्तु में हुई है। जो काकड़ा की बोरी (विशेष पूरक आहर) पहले 4200 रुपये में मिल रही थी, वह 5200 रुपये की हो गई है। खल और बिनौला भी 1000 रुपये तक महंगा हुआ है। चूरी में 100 से 300 रुपये तक भाव बढ़े हैं।
- नवल फौजी, पूरक पशु आहर विक्रेता