गुरुग्राम। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें शामिल लोग गर्भवती महिलाओं को बिजनौर जिले के गांव शब्दलपुर मिलक ले जाकर उनका अल्ट्रासाउंड करते थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुनियोजित तरीके से काम करते हुए मामले में शामिल 3 आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी 20 हजार रुपये में भ्रूण लिंग जांच करते थे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि उनको सूचना मिली थी कि गुरुग्राम का ही निवासी चंद्रपाल नामक युवक यूपी के बिजनौर में ले जाकर महिलाओं के गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जांच कराता है। इस पर संज्ञान लेते हुए सीएमओ ने तत्काल एक टीम गठित की, जिसमें पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप, डॉ. दीपांशु सैनी, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सुनीता यादव को शामिल किया। इसके बाद मोनिका नाम की एक नकली ग्राहक को जांच में सहयोग के लिए तैयार किया गया। स्वास्थ्य विभाग के कहने पर नकली ग्राहक बनी महिला के पति सुदर्शन ने चंद्रपाल से संपर्क किया।
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अमरोहा आने के लिए कहा :
चंद्रपाल ने सुदर्शन को मोनिका के साथ अमरोहा के गांव गजरौला में आने के लिए कहा। सुदर्शन अपनी पत्नी के साथ गजरौला पहुंचा और इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ दूर पहले ही रुक गई थी। कुछ देर इंतजार करने के बाद चंद्रपाल सुदर्शन कुमार के पास आया और उसे अपने साथ लेकर बिजनौर जिले के चांदपुर स्थित एक क्लीनिक पर पहुंचा।
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गांल शब्दलपुर के क्लीनिक पर हुई जांच :
वहां से उसने एक बैग में अल्ट्रासाउंड मशीन ली। इसके बाद मोनिका को मोटरसाइकिल पर बैठाकर गांव सब्दलपुर मिलक ले गया, जहां उसकी मुलाकात हसीन नामक युवक से हुई। वह अल्ट्रासाउंड मशीन व मोनिका को लेकर रेखा सैनी क्लीनिक पर गया, जहां डॉक्टर हसीन सैफी ने मोनिका का अल्ट्रासाउंड किया और उसके गर्भ में लड़का बताया। इसके बाद चंद्रपाल मोनिका को लेकर वापस चांदपुर स्थित क्लीनिक छोड़ने के लिए जा रहा था कि मोनिका के इशारे पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसको दबोच लिया।
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दो साल से कर रहे थे भ्रूण लिंग जांच
इस बारे में पूछने पर उसने बताया कि वह पिछले 2 साल से भ्रूण लिंग जांच के काम में लिप्त है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड मशीन सील कर क्लीनिक संचालक रेखा सैनी, अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉ. हसीन सैफी, और चंद्रपाल को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया। इस पूरी कार्रवाई में बिजनौर जिले के पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. सैलेश भी शामिल रहे।