भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने से मिलेगी राहत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रुपये और दिरहम में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने की कवायद से गुरुग्राम के निर्यात कारोबार को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। गुरुग्राम-मानेसर का ऑटोमोबाइल हब, इंजीनियरिंग इकाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र पहले से ही वैश्विक बाजारों से मजबूती से जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान व्यवस्था (एलसीएसएस) सक्रिय होने से निर्यातकों को अब अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने की जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी, जिससे लेनदेन की लागत और भुगतान में लगने वाले समय दोनों में बड़ी कमी आएगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-यूएई का वस्तु व्यापार 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे 2032 तक 200 अरब डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इस व्यापारिक विस्तार में गुरुग्राम का टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट और हस्तशिल्प क्षेत्र (जिसका निर्यात 2025-26 में 15,104 करोड़ रुपये रहा) मुख्य भूमिका निभाएगा। सीधे रुपये-दिरहम में भुगतान होने से जिले की नियमित निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए परिचालन सुगम होगा और यूएई के बाजार में नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
रुपये-दिरहम में सीधे भुगतान की व्यवस्था बढ़ती है तो छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान हो सकती है। - हितेश गुप्ता, उद्यमी
स्थानीय मुद्रा में लेनदेन बढ़ने से कंपनियों को अपने कारोबार की लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है। - हरिश, उद्यमी
भुगतान व्यवस्था सरल होने से नए खरीदारों के साथ कारोबार शुरू करना आसान होने की उम्मीद है। - शिवम गोयल, उद्यमी
रुपये-दिरहम में भुगतान का दायरा बढ़ने से कारोबारियों को विदेशी मुद्रा से जुड़े उतार-चढ़ाव को संभालने में कुछ राहत मिल सकती है। - अनिल राठी, उद्यमी
हरिश। रुपया-दिरहम में कारोबार वाली खबर के लिए
हरिश। रुपया-दिरहम में कारोबार वाली खबर के लिए