इस बीच केंद्रीय मंत्री ने प्रशासन और वन विभाग के आला अधिकारियों को दोबारा से सर्वे करने का आग्रह किया है। वन विभाग का नोटिस मिलने के बाद सोहना के पीड़ित लोगों ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुलाकात कर अपनी व्यथा बताई। जिसके बाद उन्होंने उपायुक्त डॉ. यश गर्ग और वन विभाग के बड़े अधिकारियों को अरावाली में तमाम तरह की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दोबारा सर्वे करने को कहा है।
एक हजार से अधिक परिवार खौफजदा
अरावाली के वन क्षेत्र में करीब एक हजार से अधिक परिवार खौफजदा हैं। एक अनुमान के मुताबिक सोहना की पहाड़ कॉलोनी, पीर कॉलोनी, नट कॉलोनी, आईटीआई कॉलोनी में करीब 900 मकान अरावली की जद में है। इसी तरह मानेसर नगर निगम के कासन और शिकोहपुर गांव की दो कॉलोनियों में करीब 110 मकान हैं। इनमें से 600 मकान मालिको और प्रतिष्ठानों को वन विभाग की ओर से नोटिस दिया गया है। नोटिस मिलने के बाद से ही ये परिवार अपने आशियाने बचाने के लिए यहां से वहां गुहार लगा रहे हैं।
स्टे पर फैसला मंगलवार को :
इस बीच वन विभाग की ओर से नोटिस मिलने के बाद ग्वाल पहाड़ी के तीन फार्म हाउस मालिकों ने नीचली अदालत से स्टे ले रखा है। इस पर तीन तारीख को सुनवाई हो चुकी है और अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। अदालत सात तारीख को अपना सुनाएगी। इस बीच दस फार्म हाउस की स्टे पर और सुनवाई बकाया है। वन विभाग गुरुग्राम के रेंज ऑफिसर कर्मवीर सिंह मलिक ने कहा कि इन तीन पर फैसला आने के बाद दस के फैसले का इंतजार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और आदेशों का हवाला देकर अपनी दलील रख दी है। दलील में यह साफ बता दिया गया है कि जो भी कार्रवाई हो रही है वह माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है। इन सभी को सेक्शन 4-5 के नोटिस दिए हैं। इन पर फैसला आने के बाद लोगों को चेतावनी देकर जगह खाली कराई जाएगी।
यहां बन रही संभावना :
लोगों के पुनर्वास की संभावना से वन विभाग भी इनकार नहीं कर रहा है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि जिस तरह सोहना नगर परिषद जमीन बदलने के लिए तैयार है, अगर सरकार चाहे तो यह संभव हो सकता है। सरकार अपने स्तर पर फैसला कर सुप्रीम कोर्ट में बता सकती है। एक सवाल के जवाब में अधिकारी ने कहा, कानून के प्रावधान के मुताबिक वन क्षेत्र से लगती जमीन की अदला बदली संभव है। लेकिन यह हाई लेवल पर ही हो सकता है।