चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी की छत गिरने के मामले में शुक्रवार को अच्छी खबर मिली। हादसे में जान गंवाने वाली सुनीता श्रीवास्तव के पति अरुण कुमार श्रीवास्तव को 17 घंटे चले राहत कार्य के बाद मलबे से बचाव कर्मियों ने जिंदा निकाल लिया। वे 1986 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस आफ इंजीनियर्स (आईआरएसई) अफसर हैं। फिलहाल, अरुण सेंट्रल वेयर हाउस कारपोरेशन में एमडी हैं।
उनके दोनों बेटे अमेरिका में हैं और ससुर पटना में सिंचाई विभाग में चीफ इंजीनियर रहे हैं। अरुण अभी अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे में एकता भारद्वाज की पहले ही मौत हो चुकी है। इस तरह हादसे में दो महिलाओं की जान गई है। सुनीता के शव को शुक्रवार को मलबे से निकाला गया।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के अधिकारियों के अनुसार, मलबा हटाने का काम अभी जारी है। पुलिस ने सोसाइटी के बिल्डर और ठेकेदार पर लापरवाही बरतने का मामला दर्ज किया है। जिला प्रशासन ने पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं। बृहस्पतिवार रात हुए इस हादसे के विरोध में निवासियों ने भी विरोध प्रदर्शन भी किया। पुलिस ने सोसाइटी के गेट सील कर दिए हैं और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि विशेष जांच टीम का गठन किया गया है जो लापरवाही के आरोपों की जांच करेगी।
सेक्टर-109 स्थित सोसाइटी के छठे फ्लोर के एक अपार्टमेंट के डाइनिंग रूम के धंसने से हादसा हुआ था। इसके नीचे जितने भी फ्लोर थे वे एक के बाद एक मलबे के वजन में पहले फ्लोर तक गिरते चले गए। एनडीआरएफ के अलावा राज्य राहत प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी भारी मशीनों के साथ मलबा हटाने में जुटी हैं। फायर ब्रिगेड की गाड़ी के एलिवेटेड प्लेटफार्म का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस में दी शिकायत में परिसर के डी ब्लाक के निवासी राजेश भारद्वाज ने कहा है कि शाम सात बजे उनके बेटे यथार्थ ने फोन पर हादसे के बारे में बताया। इसमें पत्नी एकता को गंभीर चोट आई जिससे उनकी मौत हो गई। जब वे दफ्तर से घर लौटे तो देखा कि छठे और सातवें फ्लोर की छत धंस गई है। राजेश ने आरोप लगाया कि चिनटेल्स के वरिष्ठ अधिकारी अशोक व ठेकेदार की लापरवाही से हादसा हुआ है। उपायुक्त ने बताया कि छठे फ्लोर पर निर्माण कार्य चल रहा था तभी हादसा हुआ।
एसआईटी ने शुरू की जांच
हादसे की जांच के लिए पुलिस कमिश्नर केके राव ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है। इसमें दो एसीपी और आधा दर्जन इंस्पेक्टर शामिल किए गए हैं। यह टीम इस सोसाइटी के संबंध में दर्ज किए गए सभी मामलों की जांच करेंगे। इसके अलावा चंडीगढ़ में तैनात निदेशक कंट्री एंड टाउन प्लानिंग एमके पांडुरंग ने गुरुग्राम के डीटीपी प्रवर्तन आरएस बाठ को दो दिन में घटना की जांच कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने देर शाम सोसाइटी में पहुंच कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही इस मामले में ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले की और इस आवेदन को स्वीकृत करने वाले इंजीनियर की तलाश की जा रही है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
टावर-डी के पिलर मुड़े
एनडीआरएफ की टीम ने रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों को बताया है कि हादसे के बाद टावर-डी के पिलर मुड़ गए हैं। सोसाइटी निवासी अलग से मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाना बजघेड़ा पहुंचे और तहरीर दी। सोसाइटी के लोगों ने सेफ्टी ऑडिट कराने की भी मांग की है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे मिलने पहुंचे अरुण को देखने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे मैक्स अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने उपचारधीन श्रीवास्तव से चंद मिनट मुलाकात की। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री ने सीएम मनोहर लाल से बातचीत भी की।
सामने दम तोड़ रही थी पत्नी, लाचार देख रहे थे अरुण
हादसे में अरुण और पत्नी सुनीता मलबे में दब गए थे। अरुण तो बच गए लेकिन पत्नी जिंदगी की जंग हार गईं। वह लाचार होकर मलबे में दबी पत्नी को जिंदगी की जंग हारते हुए देखते रहे। मलबे में दबे रहने के दौरान अरुण ने कई बार पत्नी को इस उम्मीद में पुकारा कि शायद कोई जवाब आए लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में प्रशासन ने सुनीता की मौत की पुष्टि की। जिसे मानने को अरुण श्रीवास्तव तैयार नहीं थे। सोसाइटी के लोगों ने बताया कि हादसे वाली शाम को अरुण श्रीवास्तव और उनकी पत्नी चाय पीते हुए टीवी देख रहे थे। 10 दिन पहले ही वह बृहस्पतिवार को कहीं बाहर से अपने फ्लैट पर वापस आए थे।