गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टॉवर-डी में फ्लैट की छत गिरने से उसके मलबे में फंसे अरुण श्रीवास्तव को निकालने के लिए एक स्थिति यह भी आई थी कि उनके दबे हुए पैर को काट दिया जाए, लेकिन बाद में चिकित्सकों की सलाह पर तय किया गया कि पांव को नहीं काटा जाएगा। तय हुआ कि मलबे को मैनुअली हटाया जाए और नारियल के तेल से पैर को चिकना करके पांव बाहर निकाला जाए और ऐसा ही किया गया। इस दौरान अरुण श्रीवास्तव को दबी हुई अवस्था में ही चिकित्सा व बेहोशी की दवा दी गई। जिससे उन्हें दर्द का अहसास न हो। इस तरह अरुण श्रीवास्तव की जिंदगी भी बच गई और पांव भी।
बृहस्पतिवार को अरुण श्रीवास्तव के दाहिने पांव पर छत का लेंटर सीधा गिर गया था। इसके कारण वह निकल भी नहीं पा रहे थे। मलबा इतना ज्यादा था कि उसे उठाना भी कठिन था। इस बीच एक सुझाव यह आया कि श्रीवास्तव के पांव को काटकर उन्हें बाहर निकाल दिया जाए। इस सुझाव पर अमल करने से पहले सिविल सर्जन की टीम से इस पहलू पर विचार करने के लिए कहा गया, लेकिन डॉक्टरों ने पांव न काटने का फैसला लिया। मलबा हटाने के दौरान अरुण श्रीवास्तव को तरल पदार्थ और बेहोश रखने वाली दवाएं दीं, जिससे उनको दर्द का अहसास न हो। रात भर मलबा हटाने का काम चलता रहा। शुक्रवार को एनडीआरएफ की टीम ने एक बार फिर से सलाह दी कि अरुण श्रीवास्तव के पैर को काट दिया जाए, जिससे उनकी जान बचाई जा सके। इसके बाद सिविल सर्जन की टीम ने एक बार फिर से स्थितियों का परीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि अरुण का दाहिना पैर ठीक है। उसमें कहीं भी फ्रैक्चर नहीं है। अगर पांव काटा जाता है तो इसके सदमे में अरुण की जान भी जा सकती है। इसके बाद फिर से पांव काटने का फैसला टाल दिया गया। सिविल सर्जन की टीम ने एक बार फिर से बेहोशी की दवा देकर पांव को बाहर खींचने की कोशिश की लेकिन उनका जूता उसमें आड़े आ रहा था। इसके बाद पांव के कुछ हिस्से को नारियल के तेल से चिकना करके सुरक्षित निकालने में सफलता मिली। अब अरुण श्रीवास्तव का इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा है। ऐसे उनकी जान भी बच गई और पांव भी सुरक्षित है, लेकिन उन्हें अपनी पत्नी को खोने का बेहद अफसोस है।