स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मदद से गाजियाबाद में भ्रूण लिंग जांच करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य गुरुग्राम से गर्भवतियों को झांसे में लेकर गाजियाबाद में जांच कराते थे। इसके लिए वह महिलाओं से 40000 रुपये लेते थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस ने गाजियाबाद के फरुखनगर स्थित तिरंगा कॉलोनी से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार मौके से फरार होने में सफल रहे। आरोपियों की पहचान शारूख, कपिल कसाना और सोविंद के रूप में हुई है। आरोपी कपिल कसाना चिकित्सक है, जबकि शारुख गुरुग्राम में दलाल का काम करता है।
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विरेंद्र यादव ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि गुरुग्राम में भ्रूण लिंग जांच के गिरोह सक्रिय हैं। वह गर्भवतियों से पैसे लेकर उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण का गाजियाबाद में लिंग जांच कराते हैं। सूचना मिलते ही पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार व डॉ. हरीश कुमार के नेतृृत्व में टीम गठित की गई। टीम में एक गर्भवती को भी शामिल किया गया। उसे नकली ग्राहक बनाकर शहर में सक्रिय दलाल शारूख से मुलाकात कराई गई। उसने गर्भवती को 40000 हजार रुपये लेकर गाजियाबाद आने को कहा।
महिला के साथ पैसे लेकर गाजियाबाद स्थित टीला मोड़ टीम पहुंची। वहां शारूख ने फरुखनगर के तिरंगा कॉलोनी स्थित एक मकान में ले गया। वहां उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण लिंग की जांच की गई। महिला के इशारे पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस की मदद से सात लोगों को काबू किया लेकिन उनमें से चार युवक धक्का-मुक्की कर मौके से फरार हो गए। फरार आरोपियों की पहचान रवि, सुमित, मोहित व सोहिल के रूप में हुई है।
50 से अधिक भ्रूण लिंग जांच
आरोपी चिकित्सक कपिल कसाना, शारूख आदि ने बताया कि वह 50 से अधिक गर्भवतियों के गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जांच की है। इसके एवज में वह सभी से 40 से 45 हजार रुपये लेते थे। स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विरेंद्र यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले भी गाजियाबाद व गुरुग्राम के सेक्टर-14 में लिंग जांच करने के मामले दर्ज हैं।
पर्ची पर एम लिखा तो बेटा होगा, एफ का मतलब बेटी
फर्रूखनगर की तिरंगा कॉलोनी में भ्रूण लिंग परीक्षण करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए 12वीं पास कपिल कसाना ने पूछताछ में कई अहम जानकारी दी। उसने बताया कि वह भ्रूण की पहचान की कोई रिपोर्ट नहीं देता था। रिपोर्ट देने से पकड़े जाने का डर रहता है। इसलिए कोड का इस्तेमाल करता था। अल्ट्रासाउंड के बाद एक पर्ची पर एम या एफ लिखकर गर्भवती महिला को दे देता था। एम का मतलब मेल यानी बेटा होगा और एफ का मतलब फीमेल यानी बेटी होगी। हर दो महीने बाद कोड को बदल देता था।
छह महीने पहले कोड लक्ष्मी और गणेश थे। लक्ष्मी का अर्थ बेटी और गणेश का बेटा। इसके बाद जी और बी रखे। जी का मतलब बेटी (गर्ल) और बी का मतलब बेटा (ब्वॉय)। गर्भवती महिला को एजेंट कोड के बारे में पहले ही बता देते थे। कुछ समय के लिए 6 और 9 भी कोड रखे। 6 लड़के के लिए और 9 लड़की के लिए। कपिल ने पूछताछ में बताया कि वह ठिकाने भी बदलता रहता है। एक ही जगह ज्यादा समय काम करने पर पकड़े जाने की आशंका बन जाती है।
रिजल्ट पता न चले तो बेटी बताता था
जावली गांव निवासी कपिल ने पुलिस पूछताछ में बताया कि लिंग भ्रूण परीक्षण करने में ज्यादा प्रशिक्षित नहीं है। केवल कुछ समय के लिए ही गुरुग्राम में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर इसे सीखा है। इसलिए कई बार रिजल्ट का पता ही नहीं चलता था। ऐसे में वह बेटी ही बताता था। इसमें पोल खुलने की आशंका कम रहती है। उसके पास ज्यादातर वे ही लोग आते हैं जो बेटी नहीं चाहते। उन्हें गर्भ में बेटी होने का पता चलता तो उसका गर्भपात करा देते। गर्भपात के कई सेंटर आसपास ही चल रहे हैं। भले ही भ्रूण बेटे का हो लेकिन इनके संचालक गर्भपात करने पर यही बताते थे कि बेटी थी। इसके लिए उनसे कह रखा था।
एनसीआर के सभी जिलों से आती थीं महिलाएं
लिंग भ्रूण परीक्षण कराने के लिए कपिल के सेंटर पर गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद सहित एनसीआर के सभी जिलों से महिलाएं आती थीं। उसने सभी जिलों में एजेंट छोड़ रखे थे। केवल उन केस को ही लेता था जो एजेंट भेजते थे। पुलिस अब एजेंट की तलाश कर रही है। कपिल ने आठ एजेंट के नाम और पते बताए हैं। एक केस भेजने पर एजेंट को तीन से चार हजार रुपये मिलते थे। कपिल एक केस के 40 से 45 हजार रुपये लेता था।
किराये पर ले रखी थी मशीन
टीला मोड़ थाना प्रभारी महावीर सिंह ने बताया कि कपिल पोर्टेबल मशीन से जांच करता था। यह मशीन दिल्ली के सीमापुरी निवासी एक युवक की है। वह 2000 रुपये प्रतिदिन के किराये पर लेकर जांच करता था। इस मशीन पर पाबंदी है। दो साल पूर्व वह दिल्ली और गुरुग्राम में अल्ट्रासाउंड सेंटर और लैब में काम कर चुका है। वहीं से उसने मशीन चलाना सीखा था।
मोबाइल लाने की इजाजत नहीं
छापा मारने वाली टीम के लीडर डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि पिछले छह माह से यह अवैध सेंटर चल रहा था। कपिल कसाना से फोन पर बात करके एजेंट जांच की तारीख उस दिन तय करते थे। एजेंट गाड़ी से गर्भवती को सेंटर पर ले जाते थे। सेंटर में सिर्फ गर्भवती महिला जाती थी। उसे मोबाइल साथ ले जाने की इजाजत नहीं थी। कपिल को डर था कि कहीं मोबाइल से उसका वीडियो न बन जाए।