गुरुग्राम। करनाल में हुए किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में जिले के किसान संगठन व किसान नेता लामबंद हो रहे हैं। एक तरफ जहां संयुक्त किसान मोर्चा पहले से ही किसानों के पक्ष में खड़ा है वहीं जिले के सामान्य किसानों में लाठीचार्ज के विरोध में जबरदस्त आक्रोश है। किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में जिले के विभिन्न इलाकों में रह रहे किसान अन्य संगठनों के साथ मिलकर जल्द ही एक बड़ी जनसभा कर सकते हैं।
इसमें आंदोलन को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जाएगी। किसानों का कहना है कि इस तरह के अलोकतांत्रिक कृत्यों से वह डिगने वाले नहीं हैं। मालूम हो कि करनाल में भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का विरोध करने आए किसानों पर पुलिस लाठीचार्ज किया था। इसको लेकर जिले के किसानों में सरकार के खिलाफ आक्रोष है। किसानों का कहना है कि सरकार अलोकतांत्रिक कदम उठाकर उनके मनोबल को तोड़ना चाहती है लेकिन इससे उनका हौसला और भी ज्यादा मजबूत होगा।
लाठीचार्ज की हम सभी किसान कड़ी निंदा करते हैं। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। उल्टे लाठीचार्ज कर सरकार दमन पर आमादा है।
- कुलराज कटारिया, किसान गुड़गांव गांव
किसानों के साथ एक मंच पर बैठकर बातचीत करने की बजाय तानाशाही सरकार अन्नदाता पर लाठीचार्ज करा रही है। ऐसे कृत्य हमें हमारे उद्देश्यों से रोक नहीं पाएंगे। कृषि कानूनों के विरोध में प्रदेश और देश के किसान एकजुट हैं।
- सतपाल सिंह, किसान ग्राम नवादा