नितिन गडकरी, मनोहर लाल, दुष्यंत चौटाला और राव इंद्रजीत सिंह ने खूबियों का अवलोकन किया
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे पर रफ्तार के रोमांच के लिए तैयार हो जाएं। प्रगति के इस एक्सप्रेसवे से व्यापार और देशभर के साथ हरियाणा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक पर्यटन विरासत को रफ्तार मिलेगी। यह देश का पहला एक्सप्रेसवे है, जो व्यापार और उद्योगों के साथ-साथ समृद्ध पर्यटन विरासत के लिए भी खास है। यह देश की राजधानी दिल्ली को गुजरात, महाराष्ट्र के कई बंदरगाहों से जोड़ेगा। इसके अलावा देश के बड़े हिस्से में पर्यटन स्थलों को भी एक-दूसरे से जोड़ने का काम करेगा। निसंदेह इससे हरियाणा के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। गुरुग्राम के सोहना से दौसा तक 246 किलोमीटर लंबा खंड रविवार को जनता को समर्पित कर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौसा के पास धनावड़ गांव से इस खंड का लोकार्पण किया। चूंकि इसकी शुरुआत हरियाणा में सोहना के अलीपुर से हुई है, इसलिए हरियाणा इस लोकार्पण कार्यक्रम का प्रथम गवाह बना। सोहना के पास बने एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, स्थानीय सांसद एवं केंद्र में मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जनरल वीके सिंह ने पहुंचकर इस एक्सप्रेसवे की खूबियों का अवलोकन किया, जहां से यह सभी नूंह के हिलालपुर पहुंचे और यहां जनता के साथ इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने की खुशी साझा की।
ढाई घंटे में पूरा होगा जयपुर का सफर
तकनीकी कारणों से इस एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं की गई है। 15 फरवरी से इस पर आवाजाही शुरू होगी। इसके बाद दिल्ली से जयपुर तक का सफर ढाई घंटे में पूरा हो सकेगा। यहां कार की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटा तय की गई है। इसका निर्माण पूरा होने के बाद यह वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (वेस्टर्न डीएफसी) के साथ दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की महत्वपूर्ण रीढ़ होगा, जो जयपुर, अजमेर, किशनगढ़, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भोपाल, उज्जैन, अहमदाबाद, इंदौर, सूरत और वडोदरा जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों को एक-दूसरे से सीधे जोड़ेगा।
पूर्व से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण को सीधे जोड़ेगा
यह देश का ऐसा पहला एक्सप्रेसवे होगा, जो पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण को सीधे जोड़ेगा। दिल्ली-हरियाणा-यूपी के जरिये यह उत्तरी और पूर्वी प्रदेशों के बड़े शहरों को जोड़ेगा। दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाइवे (डीएनडी फ्लाइवे) से यह वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे की तरह) कई अन्य एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ा होगा। राजस्थान-एमपी-महाराष्ट्र-तेलंगाना को यह कोटा-इंदौर एक्सप्रेसवे के जरिये जोड़ेगा। हैदराबाद-इंदौर एक्सप्रेसवे के जरिये नांदेड़-अकोला-ओंकारेश्वर-इंदौर के माध्यम से जोड़ेगा, जो अकोला में मुंबई नागपुर एक्सप्रेसवे को काटेगा। गुजरात में यह अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा और अहमदाबाद में यह अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। यह मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से जुड़ा होगा।
दिल्ली-एनसीआर के लिए वरदान
यह एक्सप्रेसवे दिल्ली एनसीआर के लिए वरदान साबित होगा। दिल्ली-सहित एनसीआर का प्रत्येक शहर इससे सीधे जुड़ेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से फरीदाबाद के सेक्टर-65 तक एनएचएआई द्वारा अतिरिक्त 31 किलोमीटर लंबा स्पर भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली के महारानी बाग में डीएनडी फ्लाइवे से इसे जोड़ा जा रहा है। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) से कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) के जरिये यह एनसीआर की कनेक्टिविटी आसान करेगा।
ये मिलेंगी सुविधाएं
एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों की मस्ती-मनोरंजन और खानपान के साथ दूसरी तमाम सुख सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। इसके 93 स्थानों पर एटीएम, होटल, खुदरा दुकानें, फूड कोर्ट, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन और ईंधन स्टेशनों जैसी सुविधाएं होंगी। यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे भी होगा, जिसमें दुर्घटना पीड़ितों के लिए हर 100 किमी पर हेलीपैड और पूरी तरह से सुसज्जित ट्रॉमा सेंटर होंगे।
जर्मन तकनीक पर देश का पहला इलेक्ट्रिक हाईवे
इस एक्सप्रेसवे के एक हिस्से को ई-हाईवे (इलेक्ट्रिक हाईवे) के रूप में विकसित किया जाएगा। यह पूरी तरह जर्मनी के ई-हाईवे की तर्ज पर बनेगा। जर्मनी में ई-हाईवे का निर्माण सीमेंस कंपनी ने किया है, इसलिए यहां भी इसी कंपनी के साथ ई-हाईवे विकसित करने का अनुबंध किया गया है। सीमेंस ने सबसे पहले जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में मई 2019 में ई-हाईवे बनाया है। बताया जाता है कि छह मील लंबी इस सड़क के ऊपर बिजली के बड़े केबल लगे हैं। इन केबल में 670 वोल्ट का करंट होता है। इनके नीचे से गुजरने वाले इलेक्ट्रिक ट्रक व बस इन केबल से ऊर्जा हासिल कर अपनी बैटरी रिचार्ज करते हैं।
व्यापार के साथ पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
एक्सप्रेसवे हरियाणा के गुरुग्राम से शुरू होगा और आगे राजस्थान में जयपुर और सवाई माधोपुर से होता हुआ मध्य प्रदेश में रतलाम और गुजरात में वडोदरा से होकर महाराष्ट्र में मुंबई में समाप्त होगा। दिल्ली से मुंबई एक्सप्रेसवे जयपुर, अजमेर, किशनगढ़, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भोपाल, उज्जैन, अहमदाबाद, इंदौर, सूरत और वडोदरा जैसे वित्तीय केंद्र सीधे जुड़ेंगे, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ देश के बड़े पर्यटन केंद्रों को यह कनेक्ट करेगा। इनमें जयपुर का अंबर किला, जंतर मंतर, जौहरी बाजार, हवा महल, सिटी पैलेस, अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ, जवाहर सर्कल, अना सागर झील, उदयपुर में पिछोला झील, फतेह सागर झील, सिटी पैलेस, जगदीश मंदिर, अहमदाबाद में साबरमती नदी, लॉ गार्डन बाजार, ऑटो वर्ल्ड विंटेज कार संग्रहालय, सूरत में गोपी तालाब, जगदीशचंद्र बोस एक्वेरियम, गलतेश्वर, वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस, सयाजी बाग, अजवा निमेटा गार्डन, दमन में जंपोर बीच, देवका बीच, मोती दमन किला, बोम जीसस चर्च और मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर, गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, हाजी अली दरगाह सहित अनेक पर्यटन स्थल शामिल हैं।