गुरुग्राम। गलत तरीके से अपना कार्य दूसरी एजेंसी को साझा (सबलेट) करने समेत अन्य अनियमितताओं की दोषी मलबा निस्तारण कंपनी आईएल एंड एफएस पर निगम प्रशासन खूब मेहरबान नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि आंतरिक जांच की रिपोर्ट सामने आने के डेढ़ माह से ज्यादा समय बीतने के बावजूद निगम प्रशासन अब तक कंपनी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सका है। निगम प्रशासन अब भी सिर्फ नोटिस-नोटिस खेल रहा है।
वहीं, 11 अक्तूबर को आयोजित निगम की बैठक में भी यह मुद्दा उठा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। सदन की बैठक में कंपनी के खिलाफ जांच कर उस पर कार्रवाई के लिए पार्षदों ने आवाज उठाई थी। पार्षद अश्वनी शर्मा ने बताया कि निगम के कारण बताओ नोटिस के जवाब में कंपनी ने निगम को गोलमोल जवाब देकर सिर्फ गुमराह करने का काम किया है। कारण बताओ नोटिस के जवाब में कंपनी के मालिक ने अय्यर कंपनी से खुद के किसी भी कनेक्शन से होने से इनकार किया है लेकिन दस्तावेज में यह साफ है कि तीनों कंपनियों का मालिक व पता एक ही हैं।
निगम का रहा घोटालों का इतिहास
पिछले कुछ समय से गुरुग्राम नगर निगम के इतिहास को देखें तो विज्ञापन घोटाला, स्ट्रीट वेंडिंग घोटाला, मलबा घोटाला समेत समय-समय पर कई तरह के घपले-घोटाले सामने आते रहे हैं लेकिन किसी पर भी कोई मजबूत कार्रवाई नहीं हो पाई है। अब इस मामले में भी निगम प्रशासन जिस तरह की ढिलाई दिखा रहा है, उसको देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि इसमें भी कुछ खास कार्रवाई नहीं होने वाली है। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि निगम की आंतरिक जांच में ही आईएल एंड एफएस को कई तरह की अनियमितताओं का दोषी पाया गया है। बावजूद इसके निगम प्रशासन द्वारा कंपनी को कारण बताओ नोटिस के जवाब के नाम पर मनमाना समय दिया जा रहा है।
कोई भी कार्रवाई करने से पहले हमें सभी पक्षों को देखना पड़ता है। कंपनी ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है। मामले को जिला अटॉर्नी के पास भेजा गया है, उनका जवाब आते ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
- मुकेश कुमार आहूजा, निगमायुक्त, गुरुग्राम