उच्च न्यायालय में निगमायुक्त 28 अगस्त को पेश हाेने का आदेश
निगम ने समस्या को कम करने के लिए क्या किया, होगा बताना
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब नगर निगम शहर में घूम रहे लावारिस कुत्तों के आतंक पर काबू पाने के लिए नए सिरे से कवायद करने में जुट गया है। अदालत ने 28 अगस्त को नगर आयुक्त को हाजिर होकर इस संबंध में किए गए उपायों से अवगत कराने को कहा है। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में इस समय करीब 17 हजार लावारिस कुत्ते हैं, जिन पर नियंत्रण पाना चुनौती बनी हुई है।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शहर में लावारिस कुत्तों के काटने की संख्या में वृद्धि के बावजूद निगम द्वारा लावारिस कुत्तों के खतरे को रोकने के प्रयासों को छलावा करार दिया है। न्यायमूर्ति विनोद एस. भारद्वाज ने नगर निगम आयुक्त को 28 अगस्त को सुनवाई की अगली तारीख पर उपस्थित होने और शहर में लावारिस कुत्तों के खतरे को कम करने में हुई विफलता का कारण बताने का निर्देश दिया है।
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तीन साल में 17195 कुत्तों का टीकाकरण
उच्च न्यायालय में निगम ने एक शपथ पत्र दिया है। इसके अनुसार, शहर में 17,000 से अधिक लावारिस कुत्ते हैं। निगम ने तीन वर्षों में 17,195 कुत्तों का टीकाकरण किया था। इस वर्ष 15 फरवरी से शपथपत्र दाखिल करने के दिन तक 2,908 कुत्तों का टीकाकरण किया। पिछले वर्ष 15 नवंबर को जिला उपभोक्ता फोरम ने निगम से एक लावारिस कुत्ते के काटने के पीड़ित को दो लाख रुपये का मुआवजा देने आदेश दिया था। फोरम ने कुछ कुत्तों की नस्लों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश भी जारी किया था। इनमें अमेरिकन पिटबुल, टेरियर, डोगो अर्जेंटीनो और रॉटविलर जैसी नस्ल के कुत्ते शामिल थे। इस आदेश को दो कार्यकर्ता शिवानी दस महापात्र और समीर वर्मा ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
बसई सेंटर में कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी का काम होता है। इससे उनकी संख्या नियंत्रित होती है। इसके अलावा कहीं पर अगर डॉग बाइट या कुत्तों के हिंसक होने की घटना हो रही है तो सूचित करें। हम टीम भेजकर ऐसे लावारिस कुत्तों को सेंटर में शिफ्ट करने का काम करेंगे। - डॉ. अशीष सिंगला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम