गुरुग्राम। नए वाहन के पंजीकरण में अगर मनपसंद नंबर चाहिए तो अब किसी बाबू, अधिकारी या नेता से मिन्नतें करने की जरूरत नहीं है। बोली लगाओ और अपना मनपसंद नंबर पाओ। नवनियुक्त एसडीएम अंकिता चौधरी ने वीआईपी नंबर के बंदरबांट पर अंकुश लगाते हुए नई प्रक्रिया का आगाज किया है। नई व्यवस्था के जरिए 12 लोगों को नई सीरीज ( एचआर 26- ईक्यू) के नंबर जारी भी कर दिए हैं। इसमें एक नंबर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी लिया है। इन नंबरों की एवज में 31,08000 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
एसडीएम अंकिता चौधरी ने पंजीकरण शाखा में निचले स्तर के भ्रष्टाचार पर चोट करते हुए मनपसंद नंबर के लिए एक से अधिक व्यक्ति होने की स्थिति में बोली का विकल्प दिया। इसके लिए बाकायदा काउंटर से नंबर बोल कर मुनादी कराई गई कि फलां नंबर जिसको चाहिए वह आगे आ जाए। इच्छुक व्यक्तियों को सामने बैठाकर एसडीएम ने तय राशि (सरकार की ओर से पहले ही निर्धारित) से ऊपर बोली लगवाई। जिसकी बोली सबसे अधिक रही, उसे संबंधित नंबर दे दिया गया। मनपसंद नंबर आवंटन के मामले में पहले लेन देन का खेल होता था। कोई अपने रसूख के दम पर या फिर ऊंची पहुंच से मनपसंद नंबर केवल निर्धारित फीस पर ही ले जाता था। कई बार बाबू अपने स्तर पर भी खेल कर मनपसंद नंबर आवंटन कर देते थे। इससे नंबरों के आवंटित में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे थे और सरकार को राजस्व भी नहीं मिल पा रहा था।
डिप्टी सीएम ने 1.8 लाख मेें लिया 1000 नंबर
गुरुग्राम की नई वाहन सीरीज एचआर -26 ईक्यू में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने भी रुचि दिखाई। उन्होंने 58 हजार रुपये की सबसे अधिक की बोली लगाकर एचआर-26 ईक्यू-1000 नंबर लिया। इस नंबर के लिए सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की फीस निर्धारित की गई थी। उन्हें यह नंबर एक लाख आठ हजार रुपये में अलॉट किया गया। उनकी ओर से उनके प्रतिनिधि ने बोली में हिस्सा लिया। पटौदी के विधायक सत्यप्रकाश जरावता ने 48 हजार की बोली लगाकर एचआर-26 ईक्यू- 7777 नंबर लिया। इस नंबर के लिए सरकार की निर्धारित फीस 50 हजार रुपये थी। उन्हें 98 हजार में यह नंबर दिया गया। पटौदी के पूर्व विधायक भूपेंद्र चौधरी ने 0777 नंबर 51 हजार रुपये की बोली पर लिया। इसके लिए भी 50 हजार रुपये फीस निर्धारित थी। उन्हें एक लाख एक हजार रुपये में यह नंबर दिया गया। इसके अलावा 0707 नंबर 16 हजार रुपये अधिक, 0909 नंबर 20 हजार रुपये अधिक, 1515 नंबर 40 हजार रुपये अधिक (तीनों नंबरों की तय फीस 20 हजार रुपये) में दिया गया। एक अन्य नंबर एचआर-26 ईक्यू 1111 जिसकी निर्धारित फीस 50 हजार रुपये थी, उसे 25 हजार रुपये की अधिक बोली पर दिया गया। 7000, 9999 नंबरों को क्रमश: 20 और 30 हजार रुपये अधिक की बोली में दिया गया।
आएगी पारदर्शिता : एसडीएम
एसडीएम अंकिता चौधरी ने कहा कि नई पहल से निश्चित ही पारदर्शिता आएगी। लोगों की परेशानी भी दूर होगी। इससे सरकार को राजस्व का फायदा होगा। उन्होंने कहा कि नया प्रयोग किया गया है और यह सफल रहा। आगे मनपसंद नंबर देने में यही प्रक्रिया का पालन होगा।