गुरुग्राम। अभी तक जिला नगर योजनाकार विभाग के पास इस बात के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं थे कि फ्लैट का आवंटी अगर अपनी यूनिट में कोई बदलाव करवा रहा है तो क्या होना चाहिए। अब बिल्डर आवंटन के समय आवंटी को और आरडब्ल्यूए को व विभाग को बिल्डिंग की ड्राइंग सौंपेगा। कोई भी बदलाव आरडब्ल्यूए द्वारा अधिकृत किए गए संरचनात्मक इंजीनियर की स्वीकृति के बाद ही हो सकेगा।
पिछले दिनों सेक्टर-109 स्थित चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में हुए हादसे और उसके बाद शहर की अलग-अलग इमारतों में संरचनात्मक खामियों की सामने आ रही शिकायतों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। चिनटेल्स सोसाइटी में भी हादसा फ्लैट में बदलाव कराने के लिए किए जा रहे काम के चलते ही हुआ था।
सरकार ने इन दिशा निर्देशों को लागू करने से पहले आम नोटिस जारी करते हुए सभी से दो सप्ताह के अंदर सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। यह सुझाव महानिदेशक कंट्री एंड टाउन प्लानिंग, मुख्य नगर योजनाकार, वरिष्ठ नगर योजनाकार को दिए जा सकते हैं। जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि अब तक बहुमंजिला इमारत बनाने वाले की पृष्ठभूमि जांचने का प्रावधान नहीं था। निर्माण के दौरान तीसरे पक्ष के निरीक्षण का प्रावधान भी नहीं था। संरचना सुरक्षा का प्रमाण पत्र निर्माण करने वाले को ही अपनी ओर से संलग्न करना होता था।
यह भी देखा गया कि बिल्डिंग का निर्माण होने के बाद आवंटियों ने निर्माण को लेकर कई तरह की शिकायतें कीं, लेकिन विभाग के पास कोई सटीक व्यवस्था ऐसी नहीं थी कि जो समस्या के समाधान को गति प्रदान करे। मौजूदा प्रक्रिया में इसी प्रकार की अन्य खामियों को रेखांकित किया गया है।
अब जो नए प्रावधान किए गए हैं उनके मुताबिक 70 मीटर से ऊंची इमारत में जीओ टेक्निकल इंजीनियर की स्वीकृति होनी चाहिए। साथ ही उस इंजीनियर को 10 वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए। संरचनात्मक इंजीनियरों का पैनल बनाने को आवेदन करने वालों के लिए एक पोर्टल होगा। आवेदनों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी जो साक्षात्कार और दस्तावेज के भौतिक सत्यापन आदि के माध्यम से प्रक्रिया को अंजाम देगी। इस कमेटी के चेयरमैन लोक निर्माण विभाग के रिटायर्ड मुख्य अभियंता या इसी प्रकार के समकक्ष पद पर रहे इंजीनियर होंगे। निर्माण की अच्छी गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी निरीक्षण का विकल्प रहेगा। बिल्डिंग प्लान की स्वीकृति के समय आवेदक के पास थर्ड पार्टी एजेंसी के चयन का विकल्प रहेगा।
निर्माण के बाद आने वाली शिकायतों के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग एजेंसी का गठन किया जाएगा जो 15 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। आवश्यक होगा तो यही एजेंसी संरचनात्मक ऑडिट के लिए भी प्रस्ताव करेगी। इस प्रकार के ऑडिट होने पर इसकी कीमत डेवलपर्स से वसूल की जाएगी।