- खून की कमी के जूझ रही महिलाओं को अब केवल एक ही इंजेक्शन लगवाने की जरूरत
- जिले में 57 हजार डिलीवरी, खून की पूर्ति होने से जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में भी आएगी कमी
- नीति आयोग की मदद से शुरू किया गया है ये इंजेक्शन।
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात की महिलाओं की सेहत को संवारने व उनमें खून की कमी को पूरा करने के लिए नीति आयोग की तरफ से एफसीएम नाम का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। ये इंजेक्शन गर्भवती के अलावा कमजोर व एनीमिया की शिकार महिलाओं को जिले के हर सरकारी अस्पताल में शुरू किया हुआ है, लेकिन अभी जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश महिलाएं इसका फायदा नहीं उठा पा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का इसे शुरू करने के पीछे जच्चा-बच्चा मृत्यु दर में कमी के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों की दौड़ व खर्चे से बचना भी है।
बता दें, कि मेवात में महिलाओं का स्वास्थ्य ज्यादा बेहतर नहीं है, यहां अधिकांश महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं, इसके पीछे फैमिली साइज बड़ा होने के साथ-साथ बेहतर खानपान व जागरूकता की कमी है। पूरे प्रदेश के अंदर नूंह जिले में महिलाओं की डिलीवरी सबसे अधिक है, यहां पूरे जिले में सालाना 57 हजार डिलीवरी होती हैं। देश में फैमिली साइज का अनुपात जहां 2.1 है। वहीं नूंह जिले में शैक्षणिक स्तर कम होने के कारण यह अनुपात बढ़कर 4.8 हो जाता है। जिसके कारण अधिकांश महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। करीब 57 हजार की डिलीवरी के दौरान 52 से 53 महिलाओं की मृत्यु हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए विभाग ने नीति आयोग की आर्थिक मदद से ऐसी महिलाओं को एफसीएम नाम का एक ही टीका लगाना शुरू किया है। पहले महिलाओं में खून की कमी को पूरा करने के लिए पांच सुकरोज के इंजेक्शन लगाए जाते थे, लेकिन अब एफसीएम का एक ही इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
जच्चा-बच्चा मृत्यु दर कम करने व लोग प्राइवेट अस्पतालों में लूटने से बचेंगे। इसके लिए पीएचसी, सीएचसी सहित सरकारी संस्थाओं में एफसीएम नाम का टीका महिलाओं को लगाया जाता है। महिलाएं इसे लगवाएं, इसका कोई कुप्रभाव नहीं है। ये खून की कमी को पूरा करता है। इससे जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहता है। -डाॅ. विशाल डिप्टी सिविल सर्जन, नूंह।