सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पत्थर खनन पर रोक लग गई, मगर जोन में क्रशर का कारोबार चलता रहा। नूंह और गुरुग्राम के जोन में मुख्यालय से 250 क्रेशर चलने की अनुमति है। इनमें से 12 क्रशर बंद हैं। सवाल उठता है कि अगर इन पर अवैध खनन के पत्थर नहीं आ रहे हैं तो यह कैसे चल रहे हैं। डीएसपी की हत्या के बाद क्रशर बंद हैं। कारण उनके पास अब पत्थर नहीं आ रहा है।
जिला खनन विभाग की ओर से 250 लोगों के क्रशर चलाने की अनुमति है। इनके संचालकों की ओर से राजस्थान व नारनौल की ओर से आने वाले पत्थरों को तोड़ने की बात कहीं जाती है। विभाग की ओर से अलग-अलग पांच क्रेशर जोन हैं, जिसमें गुरुग्राम में रायसीना व शिकोहपुर क्रशर जोन हैं, जबकि नूंह में रेवासन, आटा व तावडू का क्रेशर जोन हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इसमें बहुत से क्रशर बंद हैं।
बकरीद के बाद से नहीं आ रहा है पत्थर
क्रेशर पर आने वाले डंपर को चलाने वाले ज्यादातर लोग मेवात से हैं। पहले तो लोगों ने बकरीद के नाम पर तीन दिन की छुट्टी कर रखी थी। उसके बाद डीएसपी सुरेंद्र सिंह की हत्या के बाद मामला गरमा गया है। पुलिस की ओर से संबंधित गांवों में छापामारी चल रही है। आलम यह है कि क्रशर बंद हैं। हर क्रशर पर रोजाना चार से 15 डंपर पत्थर जाता था। एक क्रशर पर छह से 18 श्रमिक काम कर रहे हैं।
चोर रास्तों से डंपरों को निकालते रहे हैं माफिया
नूंह जिले में प्रतिबंध से पहले खदानें चलती थीं, लेकिन फिर भी यहां पत्थर माफिया सक्रिय हैं। अभी भी तमाम ऐसी खदान हैं, जहां पत्थर तोड़ने के ताजा निशान हैं। माइनिंग व पुलिस महकमे के अधिकारी माफिया पर कार्रवाई तो दूर, कभी जांच करने भी नहीं जाते हैं। इसके अलावा खनन माफिया ने पहाड़ों के अंदरूनी क्षेत्रों में भी ऐसे दुर्गम व चोर रास्ते बना लिए हैं जहां से ट्रक और डंपर आ जा सकते हैं।
माइनिंग व पुलिस विभाग की ओर से ऐसे रास्तों को जेसीबी से खोदकर कार्रवाई के नाम पर बंद तो किया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद ही रास्तों को समतल कर खनन माफिया अपने धंधे में लग जाते हैं। 12 दिसंबर 2002 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मेवात के अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर पाबंदी लगाई गई थी। बावजूद, यहां माफिया हमेशा सक्रिय रहे हैं।
डीएसपी हत्याकांड में चार और गिरफ्तार
डीएसपी की हत्या के मामले में पुलिस ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस कर चुकी है। आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस ने उन्हें दो दिन के रिमांड पर लिया है।
पुलिस अधीक्षक नूंह ने बताया कि अपराध जांच शाखा के प्रभारी निरीक्षक नरेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने जाबिद उर्फ बिल्ला, लंबू उर्फ ईशुफ निवासी गंडवा थाना चौपानकी जिला अलवर, भुरु उर्फ तौफिक और असरु उर्फ असरुद्दीन निवासी गांव पचगांव जिला नूंह गिरफ्तार किया है। एसपी ने बताया कि सर्च अभियान के दौरान दर्जनों गांवों से मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 236 चालान किये गए हैं। इसके अलावा माईनिंग एक्ट के तहत 60 वाहन जब्त किये गए हैं। 102 सीआरपीसी के तहत 27 वाहन जब्त किए गए हैं। मोटरसाईकिल, ट्रैक्टर, लग्जरी गाड़ी, डम्पर, कम्प्रेशर, हाईवा, जेसीबी आदि वाहन शामिल हैं।