गुरुग्राम। भूगर्भ जल, नहरों और तालाबों का पानी बचाने के लिए राज्य सरकार ने धान की खेती छोड़ने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। धान की जगह खेत खाली छोड़ने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। यदि धान छोड़कर दलहन या तिलहन की फसल उगाई जाती है तो भी ये रकम मिलेगी। इसी तरह से बाजरे को छोड़कर तिलहन और दलहन की फसल उगाने वालों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे।
उप निदेशक कृषि अनिल कुमार ने बताया कि जिले में धान की फसल नहीं उगाने के लिए 805 एकड़ पर अनुदान देने का लक्ष्य है। अब तक 28 किसानों ने इस विकल्प को चुना है जिससे 75 एकड़ में लक्ष्य पूरा हुआ है। बाकी लक्ष्य को जल्द ही पूरा किया जाएगा। किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी तरह से बाजरे की जगह तिलहन और दलहन की फसल उगाने वालों को चार हजार रुपये एकड़ का भुगतान दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को पहले ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके बाद ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ में उनका ब्योरा आएगा। दोनों प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनको इसका भुगतान किया जाएगा।