अगर आप ये सोचते हैं कि महिलाओं के साथ गांवों में ही बुरा बर्ताव होता है या आप ये मानते हैं कि केवल गांवों में ही महिलाओं के बेहद निजी कामों के लिए जरूरी सुविधाओं की अनदेखी का जाती है तो इस खबर को पढ़ने के बाद आपकी ये धारणा टूट जाएगी।
हम बात कर रहे हैं देश के सबसे विकसित और तेजी से आधुनिक होते शहर गुड़गांव की। इस शहर में महिला पुलिस बल के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जाता है उसे जान आप हैरान रह जाएंगे।
असल में गुड़गांव में ज्यादातर पुलिस थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए टॉयलेट तक नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक गुड़गांव के एक तिहाई से ज्यादा थानों में महिलाओं के लिए जरूरी बेहद मूलभूत सुविधा का अभाव है।
महिलाएं करती हैं जेंट्स टॉयलेट का इस्तेमाल
गुड़गांव के इफ्को चौक, उधोग विहार, पटौदी, सिविल लाइंस, राजेंद्र पार्क, भोंडसी, फारुख नगर और बादशाहपुर जैसे थानों में महिलाओं के लिए टॉयलेट नहीं है।
इस बारे में एक महिला पुलिस अधिकारी का कहना है कि थानों में महिला पुलिस को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है लेकिन सुविधाओं के अभाव के कारण हम पुरुषों के टॉयलेट का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर हैं।
यह जानकारी मांगने वाले आरटीआई कार्यकर्ता हरींदर ढींगरा ने बताया कि महिलाओं की निजता की अनदेखी के कारण उनके खिलाफ अपराधों में भी वृद्घि होती है।
कोर्ट ने कहा था बनवाओ टॉयलेट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले साल मई में ही आदेश दिया था कि यह सुविधाएं जरूरी हैं। कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी और गृहमंत्री को महिला कांस्टेबल के लिए टॉयलेट बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने को भी कहा था।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को इन सुविधाओं के निर्माण के लिए चार महीने का समय दिया था। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
यह चौंकाने वाली बात है कि देश के सबसे विकसित शहरों में से एक के 37% थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए शौचालय जैसी बेहद मूलभूत सुविधा तक का अभाव है।