आप सरकार के संसदीय सचिवों को सुविधाएं दिए जाने की चुनाव आयोग को भेजी जाने वाली जानकारी के बीच विधायकों के सरकारी दफ्तर पर भी तलवार लटक गई है।
आयोग ने पुराने जवाब का हवाला देकर विधायकों को दफ्तर दिए जाने की पॉलिसी मांगी है। जिसमें विभागों की तरफ से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि विधायकों को दफ्तर देने की पॉलिसी नहीं मिली, विधानसभा सचिवालय का जो पत्र मिला था, उसी हिसाब से दफ्तर आवंटित किए।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों को दफ्तर देने का प्रावधान किसी पॉलिसी में नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने जुलाई, 2015 में एक फैसला लिया जिसमें तय किया गया है कि संबंधित विधायकों की विधानसभा में एक दफ्तर दिया जाएगा।
जिन विधायकों को दफ्तर नहीं मिल पाएगा, उन्हें प्राइवेट ऑफिस चलाने के लिए मासिक एकमुश्त निर्धारित राशि मिलेगी। रामनिवास गोयल कहते हैं कि अभी किसी विधायक को प्राइवेट ऑफिस के लिए राशि भुगतान नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार दिल्ली जलबोर्ड, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड, लोक निर्माण विभाग, बाढ़ एवं सिंचाई नियंत्रण विभाग ने कई विधायकों को अपनी-अपनी जमीन या अपने कार्यालय में ऑफिस आवंटित किया है।
पुराने वेतन पर ही काम कर रहे विधायक और मंत्री
केजरीवाल
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन ऑफिस आवंटन के फैसले की उपराज्यपाल से मंजूरी लिए जाने को लेकर संशय है। यही वजह है कि विधायकों का दफ्तर छीनने का खतरा दिख रहा है। पुरानी सरकार में विधायकों को दफ्तर देने का कोई प्रावधान नहीं था।
वहीं दूसरी तरफ दिल्ली विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को ऑफिस देने के लिए सरकार को पत्र भेजा था। इसमें उपराज्यपाल से मंजूरी जैसी कोई बात नहीं है।
यहां तक की करीब आधा दर्जन विधायकों के क्षेत्र में सरकारी दफ्तर नहीं मिला है जिनके लिए एक डिजाइन का ऑफिस बनाए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से मिली हुई है।
पुराने वेतन पर ही काम कर रहे विधायक, मंत्री
सूत्रों के अनुसार, विधायक और मंत्रियों के वेतन वृद्धि का प्रस्ताव अभी मंजूर होकर नहीं आया है। केंद्र से कुछ सवालों के साथ वापस लौटी फाइल दिल्ली सरकार ने फिर से उपराज्यपाल को भेजी हुई है।
उसमें सरकार ने विधायकों के वेतन भत्ते और कुछ खर्च मिलाकर 84 हजार रुपये मासिक से बढ़ाकर 2.10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव किया है। हालांकि वेतन वृद्धि को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
पुराने वेतन के अनुसार 54 हजार रुपये वेतन भत्ते के साथ 30 हजार रुपये डाटा एंट्री ऑपरेटर, 4000 रुपये मासिक बिजली बिल और विस की हर बैठक के लिए एक हजार रुपये दिए जाते हैं।