नगर निगम की टीमों ने शहर में सर्वे किया तो स्वच्छता अभियान का सच सामने आ गया। टीम को सैकड़ों लोग न केवल खुले में शौच करते मिले, बल्कि उन्होंने निगम के इंतजाम की पोल भी खोल दी।
लोगों ने बताया कि सामुदायिक और पब्लिक टॉयलेट्स की कमी के चलते उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। कई लोग घरों में भी टॉयलेट न होने का सच उजागर हुआ। निगम अफसरों ने मौके पर ही उनसे हाउस होल्ड टॉयलेट बनवाने के लिए आवेदन फार्म भरवाए। निगम की टीमें बुधवार को सर्वे रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपेंगे।
‘अमर उजाला’ ने ‘स्वच्छता अभियान का सच’ नाम से एक सीरीज शुरू की। इसमें शहर में पब्लिक, कम्यूनिटी टॉयलेट की उपलब्धता और जरूरत में अंतर को उजागर किया। इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम ने क्षेत्रों में सर्वे कराया है।
खुले में शौच करने पर रोक लगाने और लोगों को जागरूक करने के लिए निगम की 15 टीमें शहर में निकलीं। उपनगर आयुक्त, जोनल अधिकारी, सेनेट्री इंस्पेक्टर, जलकल विभाग के अवर अभियंता, सफाई सुपरवाइजर, कर निरीक्षकों की इन टीमों ने सुबह पांच बजे से आठ बजे तक इस अभियान के तहत स्लम एरिया में जाकर खुले में शौच करने वाले लोगों से बात कर इसका कारण जाना।
अधिकांश लोग झुग्गी बस्तियों में रहने वाले, औद्योगिक क्षेत्रों में आने वाले ट्रक चालक-परिचालक, उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारी मिले। उन्होंने बताया कि सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय आसपास न होने की वजह से मजबूरन उन्हें खुले में शौच जाना पड़ता है।
इनमें कुछ लोग ऐसे भी मिले जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं। निगम अफसरों ने मौके पर ही उनसे आवेदन फार्म बनवाए। अब इनके घरों में सरकारी अनुदान से शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। ये टीमें बुधवार को यह रिपोर्ट नगर आयुक्त को देंगी।
इन स्थानों पर चला अभियान
बम्हैटा, नायफल, बयाना, महरौली, दुहाई, मोरटा, सिकरोड़, गढ़ी, विवेकानंद नगर रेलवे लाइन के पास, भूड़ भारत नगर, अंबेडकर नगर, बहरामपुर, डूंडाहेड़ा, कुटी गांव, सिकंदरपुर, कैला भट्टा की रेलवे लाइन के पास, सिहानी गांव।