जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल का कहना है कि जिले में 15 साल पहले पोलियो का अंतिम मामला आया था। उसके बाद से जिले में पोलियो का कोई केस नहीं मिला। हालांकि पोलियो जैसे मिलते-जुलते लक्षणों वाले बच्चे हर साल मिलते हैं। हर साल जिले में एक्विड फेलोरिसस पैरालाइज (एएफपी) के सैकड़ों मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों में विटामिन-डी की कमी होने के साथ ही अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। ऐसे बच्चे सही उपचार मिलने के बाद स्वस्थ हो जाते हैं। बीते साल भी जिले में एएफपी के 80 से ज्यादा मामले सामने आए थे। इस तरह के मामलों की रिपोर्टिंग डब्ल्यूएचओ करता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट पर ही स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल का कहना है कि बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों को लेकर लगातार सर्विलांस चलता है। सर्विलांस के जरिए जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें संबंधित क्षेत्र में विस्तृत सर्वे करती है। एक ही लक्षण वाले बच्चों की तलाश करती है। इस सर्वे में बच्चों के टीकाकरण की जानकारी भी की जाती है। जो बच्चे नियमित टीकाकरण से छूटे मिलते हैं, उनका टीकाकरण किया जाता है। राजनगर एक्सटेंशन वाले मामले में भी विभाग सर्वे कर रहा है। उधर, डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस अधिकारी डॉ. अभिषेक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बात करने पर बच्ची के पिता ने बताया कि रक्षाबंधन मनाने गांव गए हैं। वापस आने की सूचना देंगे, उसके बाद बच्ची की जांच कराई जाएगी।