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रोजाना 20 लाख रुपये खर्च, शहर फिर भी गंदा

Sun, 07 May 2017 10:00 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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सड़क किनारे फैला कचरा - फोटो : अमर उजाला
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राजीव शर्मा
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गाजियाबाद। प्रतिदिन 20 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर में गंदगी है। क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने 434 शहरों के सर्वेक्षण के बाद इस बात पर मुहर लगा दी है। साल भर में 72 करोड़ का भारी भरकम बजट खर्च करने के बावजूद 434 शहरों की प्रतिस्पर्धा में नगर निगम अफसर शहर को 351वीं रैंक  दिला पाए।

वर्ष 2015-16 में स्वास्थ्य विभाग ने शहर की सफाई व्यवस्था पर 66.61 करोड़ रुपये खर्च किए थे। साल 2016-17 में यह सालाना खर्च बढ़कर 72.34 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी करीब 20 लाख रुपये सफाई व्यवस्था पर प्रतिदिन खर्च किए, मगर शहर की सूरत नहीं बदली। विभाग के नकारेपन के चलते सड़क किनारे कचरा फैला हुआ है। नाले सिल्ट से अटे पडे़ हैं और सड़कों पर गंदगी की भरमार है।
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नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को नगर निगम बोर्ड फंड के 72.34 करोड़ रुपये के अलावा 14वें वित्त आयोग और अवस्थापना निधि से भी रुपया मिला है। हर साल औसतन 5 से 8 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को इन मदों में मिलता है। कमीशन के चक्कर में इस फंड को भी लुटाया जा रहा है।

कई ऐसे वाहन भी खरीद लिए गए, जिनकी जरूरत ही नहीं थी। नगर निगम में करीब 4200 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें तकरीबन 3500 कर्मचारी कांट्रेक्ट पर हैं। हर वार्ड में 20 से 60 कर्मचारी तैनात हैं। बावजूद इसके वार्डों में गंदगी रहती है। सफाई कर्मचारियों के वेतन पर पिछले साल 34.60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जबकि सामान्य कर्मचारियों के वेतन पर 62.46 लाख रुपये खर्च किए गए।
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मेयर बोले
स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की जो रैंकिंग आई है वह संतोषजनक नहीं है। पर्याप्त बजट के बावजूद ऐसे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती। सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए प्लानिंग की जा रही है। - अशु वर्मा, मेयर
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