बचपन से पौधों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि आज तक बदस्तूर निभाए जा रही हूं। सात बरस की उम्र में सबसे पहले बरगद का पेड़ लगाया था। इसके बाद तो सिलसिला ऐसा चला कि कब 57 बरस बीत गए पता ही नहीं चला। अब तो बस इसी काम से जिंदगी को सांस मिलती है।
टीएचए के राजेंद्र नगर सेक्टर तीन में रहने वालीं राज शर्मा (64) ने हरियाली को अपना जीवन समर्पित किया है। वह पेड़ मित्र नामक संस्था चलाती हैं और हर साल 12500 पेड़ लगाती हैं। खुद जिला प्रशासन भी समय-समय पर महानगर के विभिन्न इलाकों को हरा-भरा रखने की जिम्मेदारी राज शर्मा को सौंपता है।
सरकार की ओर से हिंडन एयरफोर्स में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वह बताती हैं कि दस लाख पौधे लगाने का उनका लक्ष्य है। अगर इस बीच उन्हें कुछ हो गया तो उनकी बेटी उनका लक्ष्य पूरा करेगी।
इस मिशन में शुगर मिल से रिटायर्ड जीएम उनके पति आरके शर्मा भी सहयोग करते हैं। इन्होंने अपनी घर की छत और घर के बाहर कई औषधीय गुणों वाले पौधे लगा रखे हैं।
वह सड़कों के किनारे अशोक, आंवला, नीम, बेंजामिन और छायादार पेड़ लगाती हैं। इसके साथ ही शादी या जन्मदिन जैसे मौकों पर वह लोगों से पेड़ लगवाती हैं और घर के कूड़े-कचरे से पेड़ों के लिए खाद तैयार करती हैं।
पेड़ मित्र संस्था के जरिए फैला हरियाली
राज शर्मा की पेड़ मित्र संस्था के साथ दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू के साथ ही यूके के लोग भी जुड़े हैं। समिति में कुल 700 सदस्य हैं। हर माह 500 रुपये इकट्ठा करके इन रुपयों से पौधे लगाने और देखभाल का काम किया जा रहा है। संस्था हर साल साढ़े 12000 पेड़ लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं।
मेरठ में लगाया पहला पौधा
राज शर्मा बताती हैं कि सात वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ गर्मियों में मेरठ के एक गांव में गई थी। वहां तपती धूप में किसानों को काम करते देखा। आसपास कोई पेड़ नहीं था। मैंने अपने पिता से खरीदवाकर बरगद पेड़ लगाया।
फिर कॉलेज में एनएनएस से जुड़ने के बाद मैंने बड़े स्तर पर पेड़-पौधे लगाना शुरू कर दिया और उनकी पूरी देखभाल भी की। राज शर्मा बताती हैं कि अब तक पांच लाख 45 हजार पौधे लगा चुकी हैं। दस लाख पौधे लगाने का मिशन है।
उन्होंने बताया कि पहले वह अकेली थी, लेकिन 25 वर्ष पहले संस्था बनाने के बाद वह ज्यादा से ज्यादा पौधे लगा रही हैं। लोग इनसे पौधे गोद लेते हैं। राज शर्मा अपनी टीम के साथ जाकर पौधों का निरीक्षण करती हैं और लोगों को इसके देखभाल के सही तरीके भी बताती हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए और एम फिल की डिग्री लेने वाली राज शर्मा इन लाइनों से अपनी बात समाप्त करती हैं- ‘रहें न रहें, हम महका करेंगे, चहका करेंगे, तुम्हारे उपवन में।’