गर्मी के बदलते तेवर से मासूमों की सेहत बिगड़ने लगी है। अस्पतालों में डायरिया, सर्दी-जुकाम और फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। आम दिनों में जहां ओपीडी की संख्या एक हजार से पंद्रह सौ तक होती है, वहीं अब इसकी संख्या तीन हजार तक पहुंच रही है।
उसमें भी बच्चों की संख्या ज्यादा है। चिकित्सकों की सलाह है कि इस मौसम में केवल गर्मी से बचाव ही नहीं करना है, बल्कि बच्चों के खानपान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
संयुक्त जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरसी गुप्ता के अनुसार गर्मी में बच्चों को सन बर्न, डिहाईड्रेशन, फ्लू, आई फ्लू, डायरिया, चिकन पाक्स, स्किन एलर्जी, अपच और लू लगने की परेशानी हो जाती है। इन बीमारियों की चपेट में छोटे बच्चे ज्यादा आते हैं।
कम प्रतिरोधक क्षमता और खेलने-खाने में लापरवाही के चलते बीमारी जल्दी घेर लेती हैं। सात वर्ष तक के बच्चों के बीमार होने का ज्यादा खतरा रहता है।
कैसे करें बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी तिवारी ने बताया कि बाहर निकलते समय बच्चों के शरीर को कपड़े से ढककर रखेें। सिर पर मोटा कपड़ा या तौलिया रखें। पानी पिलाने का पूरा ध्यान रखें। थोड़ी-थोड़ी देर में बच्चों को पानी देते रहें।
तेज धूप से आने के तत्काल बाद पानी न पिलाएं। बच्चों को केला, खरबूजा, तरबूज, खिचड़ी, नीबू पानी और मौसमी फल देते रहें। इसके अलावा बच्चों को पहले से कटे फल या बासी खाना खिलाने से बचें।