गाजियाबाद। नगर निगम सीमा में हाउस टैक्स में तीन से चार गुना की बढ़ोतरी के खिलाफ दायर याचिका को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इससे शहर के साढ़े पांच लाख करदाताओं पर बोझ बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इस आदेश के बाद याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शहरवासियों के हित में वह अपील में जाएंगे।
याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी ने बताया कि बिना बोर्ड की सहमति के ही गृहकर में तीन से चार गुना तक की बढ़ोतरी कर दी गई थी। 23 मई 2025 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं में पुर्व पार्षद हिमांशु मित्तल, अनिल स्वामी भी शामिल थे। राजेंद्र त्यागी ने कहा कि उनका सवाल आज भी वही है कि बोर्ड बड़ा या नगर आयुक्त। शहरवासियों के हित में दायर याचिका खारिज होने की जानकारी मिल गई है। पोर्टल से जानकारी मिली है। शहर हित में वह इस फैसले के खिलाफ अपील में जाएंगे। उन्होंने बताया कि याचिका में महापौर को भी पक्षकार बनाया गया था।
पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि नगर निगम बोर्ड से बड़ा कोई नहीं है। 30 जून 2025 को हुई बोर्ड की बैठक में हाउस टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव को बोर्ड ने रिजेक्ट कर दिया था। खास बात यह कि इस बैठक में विधायक, मंत्री भी शामिल हुए थे। सभी ने शहरहित में इसे सिरे से नकार दिया था। बावजूद इसके नगर निगम अधिकारियों ने मनमानी ढंग से बढ़े हुए टैक्स को वापस नहीं माना। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऑर्डर को पहले पढ़ेंगे और विधिक विश्लेषण करेंगे और मामले में अपील में जाएंगे।