लोगों की रुचि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बढ़ाने के लिए परिवहन विभाग ने प्रयास तेज कर दिए हैं। शहरों के अंदर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गति धीमी रहने से लोगों की इसमें रुचि नहीं बढ़ पा रही है। परिवहन विभाग ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गति बढ़ाने की योजना तैयार की है।
शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बसों) की गति दोगुना करने की तैयारी है। इसके लिए 15 अप्रैल को मीटिंग की जाएगी। सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका मुख्य कारण ज्यादातर लोगों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग न करने को माना जा रहा है।
हर किसी को अपने गंतव्य पर पहुंचने की जल्दी होती है। ऐसे में वह जल्दी पहुंचाने वाले साधनों का प्रयोग करते हैं। बसों के धीमे चलने केकारण ही समर्थ लोग अपने वाहनों का प्रयोग करते हैं।
एआरटीओ केपी गुप्ता ने बताया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट यदि लोगों को समय से गंतव्य तक पहुंचा दे तो लोग अपने वाहनों का ज्यादा प्रयोग नहीं करेंगे। परिवहन विभाग केसर्वे में सामने आया है कि शहरों में बसों की औसत गति 15-16 किमी प्रतिघंटा की आती है।
यदि जाम को कम करके पब्लिक ट्रांसपोर्ट की गति बढ़ा दी जाए तो ज्यादातर लोग इनका प्रयोग करेंगे और निजी वाहनों की संख्या कम हो जाएगी। एआरटीओ प्रवर्तन शेर सिंह यादव ने बताया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की स्पीड तेज करने के लिए विभिन्न विभागों की एक कमेटी बनाने की तैयारी है।
इसमें निजी निकायों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों, जीडीए, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के अफसर रहेगे। यह कमेटी बसों के रास्तों में आने वाले अवरोधों को दूर कराने की नीति तैयार करेगी। इसके लिए बसों के लिए सड़कों पर अलग लेन बनाना भी शामिल है। यदि बसों की गति 30-40 किमी प्रतिघंटा हो जाती है तो 50 फीसदी निजी वाहनों में कमी लाना संभव हो सकेगा।