निठारी कांड के 13वें मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया है। इसके पहले 12 मामलों में कोली को फांसी की सजा हो चुकी है। सुरेंद्र कोली ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई और कहा कि उसे पहली बार सच्चा न्याय मिला है। इसी तरह अन्य मामलों में भी वह निर्दोष था।
इस मामले में कोली ने स्वयं अपने मुकदमे की पैरवी करते हुए कोर्ट में बहस की थी। वहीं सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा का कहना है कि अदालत के फैसले की कॉपी मांगी गई है। 30 मार्च को कॉपी मिलेगी, उसके बाद अध्ययन करके ही कुछ कह पाएंगे।
यह था निठारी कांड
निठारी गांव निवासी कई लोगों के बच्चे वर्ष 2004 से लापता हो रहे थे। गायब होने वालों में अधिकतर लड़कियां थीं। एक युवती भी निठारी की पानी की टंकी के पास से लापता हो गई थी। 2006 में सेक्टर-19 निवासी युवती के पिता ने डी-5 सेक्टर-31 कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर पर बेटी के अपहरण का शक जाहिर करते हुए पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने वादी को ही बेटी से देह व्यापार कराने का आरोप लगाते हुए भगा दिया था।
इसके बाद पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद उसी साल 15 दिसंबर को अधिकारियों ने मोनिंदर व नौकर सुरेंद्र कोली से पूछताछ की, लेकिन रात में ही दबाव के कारण छोड़ दिया।
हाईकोर्ट में पुलिस द्वारा बनाई गई रिपोर्ट को पेश किया गया। इसमें मोनिंदर व सुरेंद्र को क्लीन चिट देने का प्रयास करते हुए वादी को ही आरोपी बनाने का प्रयास हुआ। हाईकोर्ट ने एक बार फिर पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की और पुलिस को प्रगति आख्या देने के लिए कहा। इसी बीच लापता हुई युवती का मोबाइल चालू हो गया। 29 दिसंबर को पुलिस मोबाइल व सुरेद्र कोली तक पहुंच गई।