पर्यावरण मुद्दे पर एनजीटी बेहद सख्त है। गाजियाबाद समेत अन्य क्षेत्रों में हो रहे भूगर्भ जल दोहन से संबंधित एक रिट याचिका एनजीटी पर सुनवाई करते हुए गाजियाबाद जिला प्रशासन समेत कई विभागों के अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में एनजीटी के समक्ष आधी-अधूरी रिपोर्ट ही पेश की गई थी। एनजीटी ने अब अधिकारियों को दो सप्ताह का समय देते हुए पूरी रिपोर्ट मांगी है।
इस संबंध में एनजीटी में याचिकाकर्ता सुशील राघव ने याचिका दायर की हुई है कि एनसीआर में दर्जनों फैक्ट्रियां नियमों को ताक पर रखकर पर्यावरण को दूषित कर रही हैं। फैक्ट्रियों द्वारा बोरवेल लगाकर भूजल का दोहन किया जा रहा है। इस कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। याचिका में 233 फैक्ट्रियों को चिन्हित करके जांच कराने का अनुरोध किया गया था।
जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिला प्रशासन गाजियाबाद, जीडीए, नगर निगम, यूपीएसआईडीसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला उद्योग केंद्र और क्षेत्रीय निदेशक केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को निर्देशित किया था कि वह फैक्ट्रियों की जांच कराकर रिपोर्ट दें।
गाजियाबाद प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में एनजीटी को बताया कि 233 फैक्ट्रियों में से 193 स्मॉल फैक्ट्री, 31 मध्यम श्रेणी फैक्ट्री और 9 बढ़ी फैक्ट्रियां हैं। प्रशासन ने 187 फैक्ट्रियों की रिपोर्ट पेश करते हुए एनजीटी को बताया कि इनमें से 110 फैक्ट्रियों में एक-एक बोरवेल लगा है, जबकि 77 फैक्ट्रियों में एक से ज्यादा बोरवेल लगे हैं। इस पर नाराज एनजीटी ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाते हुए दो सप्ताह में पूरी रिपोर्ट मांगी है।