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गाजियाबाद: हिंदुत्व और लिंचिंग पर संघ प्रमुख ने कही यह बड़ी बात, अब मचा सियासी घमासान, जानें पूरा मामला

Mon, 05 Jul 2021 09:24 AM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद

सार

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रहे ख्वाजा डॉ. इफ्तखार हसन की किताब ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का मेवाड़ इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि जो भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं, वे सब हिंदू हैं। 
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - फोटो : ट्विटर ANI
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विस्तार
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गाजियाबाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि हिंदू-मुस्लिम की एकता की बातें भ्रामक हैं, क्योंकि दोनों एक ही हैं। दोनों का इतिहास और पृष्ठभूमि अलग-अलग हो सकती है, लेकिन पूर्वज समान हैं, दोनों का डीएनए एक ही है। दोनों एक होकर भी एक नहीं हुए, इसकी वजह राजनीति है। 

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अल्पसंख्यकों के मन में यह डर बिठाया गया कि हिंदू उसको खा जाएगा। अन्य देशों में ऐसा होगा जहां बहुसंख्यक अल्पसंख्यक पर हावी हैं, लेकिन हमारे यहां जो भी आया, वह आज भी मौजूद है। हिंदू-मुस्लिम जब खुद को अलग-अलग मानते हैं, तब संकट पैदा होता है। हम निराकार के साथ आकार की भी श्रद्धा रखते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रहे ख्वाजा डॉ. इफ्तखार हसन की किताब ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’ का मेवाड़ इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विमोचन करते हुए उन्होंने कहा कि जो भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं, वे सब हिंदू हैं। 
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गाय को हम अपनी मां मानते हैं, लेकिन गाय के नाम पर मॉब लिंचिंग सही नहीं हैं। लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व के खिलाफ हैं। उनके खिलाफ कानून को अपना काम करना चाहिए। दोषी चाहें किसी भी समाज का हो, उसे सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में सब एक हैं, इसका आधार है हमारी मातृभूमि। इसलिए यहां कभी झगड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह हमारी शक्ति है, लेकिन हम इसका उपयोग नहीं करते। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए हम सबको बड़ा बनना होगा, सबको साथ लेकर चलना होगा। जब हम अपने पूर्वजों के बारे में सोचते हैं तो पाते हैं कि सभी एक हैं। ऐसा सोचने से मन में अपनापन आ जाता है।

यह प्रयास मुस्लिम वोटों के लिए नहीं है
हिंदू-मुस्लिम का डीएनए एक बताने के बाद मोहन भागवत ने कहा कि हम वोट की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। हमारा प्रयास अगले चुनाव में मुस्लिमों का वोट पाने के लिए भी नहीं है। चुनाव में हम ताकत लगाते हैं, लेकिन हमारा काम राष्ट्र के लिए है। संघ अपनी छवि की परवाह नहीं करता है। दुनिया चाहें जो सोचे, हम अपना काम कर रहे हैं। मनुष्यों को जोड़ने का काम राजनीति के वश का नहीं है। राजनीति इस काम का औजार नहीं है, बल्कि इसे बिगाड़ने का हथियार है।

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सरसंघचालक मोहन भागवत के भाषण की प्रमुख बातें 

1. गाय के नाम पर लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व के खिलाफ हैं। उन्हें कड़ी सजा मिले। भारत हिंदू राष्ट्र है। गाय हमारी माता है।

2. भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हम सबको साथ मिलकर चलने की जरूरत है। देश को बड़ा बनाना है तो सबको एक साथ चलना होगा। 

3. हिंदू-मुस्लिम एकता भ्रामक शब्द है। यह दोनों अलग नहीं हैं, बल्कि एक ही हैं। जब दोनों मानते हैं कि अलग हैं तभी संकट होता है। हम एक ही हैं। हम निराकार के साथ आकार की भी श्रद्धा रखते हैं। 

4. हम एक हैं और इसका आधार है हमारी मातृभूमि है। इसलिए यहां कभी झगड़ा करने की जरुरत नहीं पड़ती। आज भी इसकी शक्ति है, लेकिन हम इसका उपयोग नहीं करते। 

5. हम समान पूर्वजों के वंशज हैं। हम भारत के सब लोगों का डीएनए समान है। इस आधार पर आरुढ होकर हम विचार करते हैं तो मन में अपनापन आ जाता है।

6. अल्पसंख्यकों के मन में यह बैठाया गया है कि हिंदू उनको खा जाएंगे। किसी अन्य देश में ऐसा होगा जहां बहुसंख्यक किसी अल्पसंख्यक समाज पर हावी हैं, लेकिन हमारे यहां जो भी आया वो आज भी मौजूद है। 

7. हिंदू और मुस्लिम की इतिहास और पृष्ठभूमि अलग हो सकती हैं लेकिन पूर्वज समान हैं। 

8. एक नहीं हुए इसकी वजह राजनीति है। जख्म हुए हैं उसकी प्रतिक्रिया तीव्र है। सब लोगों को समझदार बनाने के लिए समय लगेगा। देश की एकता को बाधा डालने वाली बातों के खिलाफ हिंदू ही खड़ा होता है।
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