डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद की पुस्तक ‘द मीटिंग ऑफ माइंडस : अ ब्रिजिंग इनिशिएटिव (वैचारिक समन्वय : एक व्यावहारिक पहल)’ के विमोचन के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कल लोग कहेंगे ‘भागवत आप बहुत भोले हो, इसलिए ऐसी पुस्तक का विमोचन कर दिया। इस पर डॉ. अहमद ने कहा कि लोग मुझ पर संघी होने का तंज कसेंगे।
इसके बाद दोनों ने कहा कि उन्हें लोगों के कुछ कहने की कोई फिक्र नहीं क्योंकि उनके लिए अपनी धरती पर एक संग मिलकर खुशहाल जीवन से बड़ा कुछ नहीं। उन्हें वह दुनिया चाहिए, जब 1857 में हर भारतीयों की प्राथमिकता अपनी मातृभूमि की आजादी व खुशहाली थी। विभाजन का दर्द उन्हें अब आगे नहीं झेलना है। हम दुनिया के सामने भारत को एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में ले जाने की क्रांति लिखने को इकठ्ठे हुए हैं।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा, जब मेरे पास यह पुस्तक आई थी तो मैंने सरसरी निगाह डालकर ही बोल दिया था कि इसका विमोचन मैं करूंगा, क्योंकि इस किताब में सत्य है। यह कार्यक्र्तम पहले होना था, लेकिन कोरोना की वजह से तारीख आगे बढ़ती गई। हिंदू और मुस्लिमों के साथ चलने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, हमारी मातृभूमि एक है, लेकिन हम झगड़कर भी यहीं रहते हैं। यह हम सभी को शुरू से अब तक पालती आ रही है। पहले जो से भी लोग आए थे, उन्हें भी मातृभूमि ने अपनाया।
अथर्व वेद का जिक्र कर कहा कि अनेक भाषाओं को मानने वाले यहां रहते हैं। इस समय में जो लोग डर या सत्ता की वजह से एक नहीं होना चाहते, वे गलत हैं। हमें बिना किसी लालच के एक होना होगा। लोग यह ना समझें कि पुस्तक का विमोचन वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए किया गया है। हम सिर्फ राष्ट्रवाद की बात करते हैं। राजनीति संघ और स्वंयसेवकों का काम नहीं है। संघ जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति तोड़ने का हथियार है। राजनीति की वजह से ही हिंदू-मुस्लिम एक नहीं हो सके। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक प्रो. शाहिद अख्तर ने कार्यक्रम का संचालन किया।
कार्यक्रम के शुरुआत में दी मीटिंग ऑफ माइंड्स पर आधारित एक वीडियो स्क्रीन पर प्ले की गई। इसमें सबसे पहले डॉ. करन सिंह ने अपने विचार रखे। उन्होंने इस किताब के लिए लेखक डॉ. ख्वाजा अहमद का आभार किया। आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार ने कहा कि चार जुलाई का दिन पूरे विश्व के लिए एतिहासिक दिन है। जिसमें सरसंघ संचालक डॉ. मोहन भागवत ने किताब का विमोचन किया। इनके अलावा महाराज अवधेशानंद गिरी, सैयद अहमद बुखारी समेत करीब दस वरिष्ठ लोगों ने अपने विचार रखे।
11 माह में लिखी 500 पेज की ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’
लेखक डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने बताया कि इस किताब को तीन भाषा में लिखा गया है। सबसे पहले अंग्रेजी और फिर हिंदी व उर्दू में अनुवाद किया गया है। 11 माह में 500 पेज की किताब लिखी गई है। किताब को लिखने की जरूरत इसलिए पड़ी कि जो हमारे समाज में एक दूसरे से विश्वास न होना और रिश्तों में कहीं-कहीं पर से एक कड़वाहट नजर आती है। यह राष्ट्रहित में नहीं है।
हमें दुनिया के सामने खुद को एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में ले जाना है। संघ और उसकी आइडियोलॉजी एक हिंदुत्व की आइडियोलॉजी है। आज के राष्ट्र की एक सच्चाई है कि मुस्लिम और आरएसएस के बीच के रिश्ते एक भरोसे के नहीं हैं। पिछले 25 वर्षों में वह इस प्रयास में थे कि एक अच्छा समाज और एकता-अखंडता के लिए दोनों के बीच की दरारें दूर करें। कार्यक्रम से कल के हिंदुस्तान की नई बुनियाद रखी जाएगी।
आज फिर मेवाड़ कॉलेज आएंगे संघ प्रमुख
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आज भी वसुंधरा सेक्टर- 4 के मेवाड़ कॉलेज में पहुंचेंगे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे वह कार्यक्रम में पहुंच जाएंगे। उनकी यह बैठक गोपनीय होने की वजह से इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लिहाजा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखेगा। बताया गया है कि संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत कॉलेज परिसर में भाजपा और आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।