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भागवत ने कहा : कल लोग मुझे भोला कहेंगे तो अहमद बोले, मुझे संघी कहकर तंज कसेंगे

Mon, 05 Jul 2021 04:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद

सार

  • आरएसएस प्रमुख व लेखक बोले, लोगों के कुछ कहने की नहीं, इंसानियत को जिंदा रखने की फिक्र है
  • मेवाड़ कॉलेज में एतिहासिक रहा पुस्तक विमोचन
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पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में भागवत... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद की पुस्तक ‘द मीटिंग ऑफ माइंडस : अ ब्रिजिंग इनिशिएटिव (वैचारिक समन्वय : एक व्यावहारिक पहल)’ के विमोचन के मौके पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कल लोग कहेंगे ‘भागवत आप बहुत भोले हो, इसलिए ऐसी पुस्तक का विमोचन कर दिया। इस पर डॉ. अहमद ने कहा कि लोग मुझ पर संघी होने का तंज कसेंगे।

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इसके बाद दोनों ने कहा कि उन्हें लोगों के कुछ कहने की कोई फिक्र नहीं क्योंकि उनके लिए अपनी धरती पर एक संग मिलकर खुशहाल जीवन से बड़ा कुछ नहीं। उन्हें वह दुनिया चाहिए, जब 1857 में हर भारतीयों की प्राथमिकता अपनी मातृभूमि की आजादी व खुशहाली थी। विभाजन का दर्द उन्हें अब आगे नहीं झेलना है। हम दुनिया के सामने भारत को एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में ले जाने की क्रांति लिखने को इकठ्ठे हुए हैं।

डॉ. मोहन भागवत ने कहा, जब मेरे पास यह पुस्तक आई थी तो मैंने सरसरी निगाह डालकर ही बोल दिया था कि इसका विमोचन मैं करूंगा, क्योंकि इस किताब में सत्य है। यह कार्यक्र्तम पहले होना था, लेकिन कोरोना की वजह से तारीख आगे बढ़ती गई। हिंदू और मुस्लिमों के साथ चलने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, हमारी मातृभूमि एक है, लेकिन हम झगड़कर भी यहीं रहते हैं। यह हम सभी को शुरू से अब तक पालती आ रही है। पहले जो से भी लोग आए थे, उन्हें भी मातृभूमि ने अपनाया। 
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अथर्व वेद का जिक्र कर कहा कि अनेक भाषाओं को मानने वाले यहां रहते हैं। इस समय में जो लोग डर या सत्ता की वजह से एक नहीं होना चाहते, वे गलत हैं। हमें बिना किसी लालच के एक होना होगा। लोग यह ना समझें कि पुस्तक का विमोचन वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए किया गया है। हम सिर्फ राष्ट्रवाद की बात करते हैं। राजनीति संघ और स्वंयसेवकों का काम नहीं है। संघ जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति तोड़ने का हथियार है। राजनीति की वजह से ही हिंदू-मुस्लिम एक नहीं हो सके। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक प्रो. शाहिद अख्तर ने कार्यक्रम का संचालन किया।

कार्यक्रम के शुरुआत में दी मीटिंग ऑफ माइंड्स पर आधारित एक वीडियो स्क्रीन पर प्ले की गई। इसमें सबसे पहले डॉ. करन सिंह ने अपने विचार रखे। उन्होंने इस किताब के लिए लेखक डॉ. ख्वाजा अहमद का आभार किया। आरएसएस लीडर इंद्रेश कुमार ने कहा कि चार जुलाई का दिन पूरे विश्व के लिए एतिहासिक दिन है। जिसमें सरसंघ संचालक डॉ. मोहन भागवत ने किताब का विमोचन किया। इनके अलावा महाराज अवधेशानंद गिरी, सैयद अहमद बुखारी समेत करीब दस वरिष्ठ लोगों ने अपने विचार रखे।

11 माह में लिखी 500 पेज की ‘द मीटिंग ऑफ माइंड्स’
लेखक डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने बताया कि इस किताब को तीन भाषा में लिखा गया है। सबसे पहले अंग्रेजी और फिर हिंदी व उर्दू में अनुवाद किया गया है। 11 माह में 500 पेज की किताब लिखी गई है। किताब को लिखने की जरूरत इसलिए पड़ी कि जो हमारे समाज में एक दूसरे से विश्वास न होना और रिश्तों में कहीं-कहीं पर से एक कड़वाहट नजर आती है। यह राष्ट्रहित में नहीं है।

हमें दुनिया के सामने खुद को एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में ले जाना है। संघ और उसकी आइडियोलॉजी एक हिंदुत्व की आइडियोलॉजी है। आज के राष्ट्र की एक सच्चाई है कि मुस्लिम और आरएसएस के बीच के रिश्ते एक भरोसे के नहीं हैं। पिछले 25 वर्षों में वह इस प्रयास में थे कि एक अच्छा समाज और एकता-अखंडता के लिए दोनों के बीच की दरारें दूर करें। कार्यक्रम से कल के हिंदुस्तान की नई बुनियाद रखी जाएगी।

आज फिर मेवाड़ कॉलेज आएंगे संघ प्रमुख
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आज भी वसुंधरा सेक्टर- 4 के मेवाड़ कॉलेज में पहुंचेंगे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे वह कार्यक्रम में पहुंच जाएंगे। उनकी यह बैठक गोपनीय होने की वजह से इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लिहाजा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखेगा। बताया गया है कि संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत कॉलेज परिसर में भाजपा और आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

भागवत ने कहा- इस्लाम खतरे में है, इस डर से बाहर निकलें

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुस्लिमों को भरोसा दिया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। मुस्लिमों को अपने मन से यह डर निकालना होगा कि इस्लाम खतरे में है। यह डर दिखाकर कुछ लोग अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। अब समय आ गया है, हिंदू-मुस्लिम का नाम छोड़ो, झगड़ा छोड़ो। हम सभी को मिलकर भारत को विश्वगुरु बनाना है। यह दुनिया की आवश्यक्ता है, इसी से दुनिया बचेगी। भारत विश्वगुरु तभी बन सकता है, जब हिंदु और मुस्लिम साथ मिलकर चलें।

उन्होंने सवाल किया,  हमारी भारत माता के पुत्र, हमारी संस्कृति के विरासतदार, हमारे पूर्वज शासकों के भाई मुस्लमान साथ क्यूं नहीं दे सकते? वे हमसे कैसे अलग हो सकते हैं। यह एक कुचक्र्त है जिससे उनके मन में डर बिठाया जाता है।  इसी के कारण एक अलगाव और अविश्वास पैदा हो गया है। हम सभी को एक होकर इसे दूर करना होगा। इसी में देश की भलाई है, हम सबकी भलाई है, पूरी दुनिया की भलाई है। इसलिए हम कहते हैं कि हिंदुस्तान एक हिंदू राष्ट्र है और गाय हमारी मां है।

देवबंद और बरेली के बीच की दूरी कम हुई
कार्यक्रम में लेखक डॉ. ख्वाजा इफ्तखार अहमद ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच जो शंकाएं 100 साल से चलीं आ रहीं हैं, उनको देखते हुए आज का दिन एतिहासिक है। अभी तक जो हुआ सो हुआ लेकिन अब दोस्ती और भरोसा होगा। उन्होंने कहा कि देवबंद और बरेली के बीच की दूरी भी कम हुई है। अब हम सबके बीच की दूरी कम हो जाएगी।  अलग अलग विचारधारा वाले धर्म गुरु किसी एक मुद्दे पर एक हो जाएं ये चमत्कार से कम नहीं। राष्ट्रहित की बात पर सभी एक हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र्त करते हुए कहा कि मैं अटल बिहारी वाजपेयी का सबसे बड़ा प्रशंसक हूं। हमें किसी भी चीज के बारे में पढ़ना है,  समझना है और तब आगे बना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि मैं मोदी जी के बारे में कहना चाहता हूँ कि मोदी सबसे ज्यादा निर्णय लेने वाले पीएम हैं। सबसे कंविनसिंग प्रधानमंत्री हैं। हमारे सौभाग्य है कि की वह हमारे पीएम हैं।


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जो कहे यहां मुस्लिम नहीं रहने चाहिए, वह हिंदू नहीं

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 40 मिनट के उद्बोधन में मुस्लिमों को संघ के करीब लाने की कोशिश में दिखाई दिए। उनके भाषण का आधे से ज्यादा हिस्सा यही समझाने पर था कि हिंदुस्तान में मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मुस्लिमों को यहां नहीं रहना चाहिए, वे हिंदू नहीं हो सकते। भागवत ने हिंदू और हिंदुत्व की सबसे बड़ी खूबी यही बताई कि ये किसी के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने यह समझाने का प्रयास भी किया कि किसी भी तरह के कट्टरवाद का संघ हिमायती नहीं है। 

भले ही वह हिंदुत्व के नाम पर कट्टरवाद ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि गाय माता पूजनीय है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि गाय के नाम पर मॉब लिचिंग कर कानून हाथ में लेने की छूट किसी को दी जाए। समय आ गया है जब भाषा, प्रांत की विषमताओं को छोड़कर हम एक हों। वसुंधरा के सेक्टर-चार स्थित मेवाड़ इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्र्तम में उन्होंने भारत को हिंदू राष्ट्र बताया, लेकिन साथ ही कहा कि यहां सब धर्म के लोग सुरक्षित हैं।
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