डीसीपी नगर राजेश कुमार ने बताया कि आलम और पूजा चार साल से सह संबंध (लिव इन रिलेशन) में रह रहे थे। छह महीने पहले दोनों ने निकाह किया। इसके बाद आलम ने पूजा को विजयनगर में किराए पर कमरा दिला दिया। वह पहली पत्नी सना के साथ गोंदी गांव में रहता है। दूसरे निकाह के बाद वह कभी गोंदी में रहता तो कभी विजयनगर में पूजा के साथ।
आलम ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि कुछ दिनों से पूजा ने जिद पकड़ ली थी कि वह सना को छोड़कर उसके ही साथ रहे। उसे काफी समझाया कि ऐसा मुमकिन नहीं है लेकिन वह जिद पर अड़ी रही और दबाव बनाने लगी। इसलिए, सोच लिया कि उसकी हत्या के सिवाय कोई चारा नहीं है।
चुनरी से गला घोंटकर कार में ली जान
आलम ने पुलिस को बताया कि वह पूजा की हत्या करने की ठान चुका था लेकिन यह नहीं सोचा था कि उसकी जान कब लेनी है। 19 जुलाई को उसे उसकी हत्या करनी पड़ी। इसकी वजह बताते हुए उसने कहा कि उसका चार साल का बेटा जिब्राल मसूरी के अस्पताल में भर्ती था।
पूजा फोन पर उससे विजयनगर आने के लिए कह रही थी। उसे मना किया तो मानी नहीं, फोन करती रही। साफ इन्कार करने पर उसने गुस्से में कहा कि वह अस्पताल ही आ रही है। तभी सोच लिया कि आज उसका काम तमाम करना है। अस्पताल के बाहर ही उसे कार में बिठा लिया। बात करने के बहाने साथ ले गया। रास्ते में उसकी ही चुनरी से गला दबाकर हत्या कर दी और शव को ले जाकर गंगनहर में फेंक दिया। अगले दिन 20 जुलाई को विजयनगर थाने जाकर उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
मोबाइल की लोकेशन से खुला राज
पूजा की बहन पूनम 21 को विजयनगर थाने पहुंचीं। उन्होंने तहरीर देकर कहा कि बहन लापता नहीं हुई है, उसका आलम ने अपहरण किया है। पुलिस उससे पूछताछ करे तो सच सामने आ जाएगा। इस पर पुलिस ने पहले आलम और पूजा के मोबाइल की लोकेशन निकलवाई। मसूरी के अस्पताल से गंगनहर तक दोनों की लोकेशन एक ही जगह की आ रही थी। इससे शक हो गया।
एसीपी रितेश त्रिपाठी ने बताया कि आलम से पूछताछ की गई तो उसने जुर्म कुबूल कर लिया। उसने बताया कि विजयनगर की रहने वाली पूजा पहले से शादीशुदा थी और पहले पति टीटू से अलग रह रही थी। उसके तीन बच्चे हैं। उसने बताया कि उसके पहली पत्नी सना से चार बच्चे हैं। ऐसे में वह पहली पत्नी और बच्चों को नहीं छोड़ सकता था।