गाजियाबाद। एक ही केस में एक ही दिन में दो निर्णय सुनाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के तत्कालीन अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) संदीप सिंह से जवाब तलब किया है। आदेश में कहा गया कि वर्तमान में रामपुर में तैनात अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र अदालत में प्रस्तुत कर बताएं कि एक ही केस में दो अलग-अलग आदेश कैसे पारित किए गए। रामपुर जनपद न्यायाधीश को आदेश का पालन कराने के लिए कहा गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट से पारित आदेश में कहा गया है कि अंकुर गर्ग बनाम पारुल अग्रवाल का केस मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की गाजियाबाद की अदालत में चल रहा है। अंकुर ने पारुल पर आरोप लगाया था कि उन्होंने गलत तथ्यों के जरिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया। इससे उनकी सामाजिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठा खराब हुई है। इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अर्जी को यह कहकर खारिज कर दिया कि जांच अधिकारी ने कोई दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है। यह आदेश अदालत की साइट पर अपलोड हो गया। इसके बाद उसी दिन दूसरा आदेश जारी किया कि केस की सुनवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि 13 फरवरी को मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर दो आदेश पारित किए हैं। एक आदेश जो सीआईएस प्रणाली पर अपलोड किया गया था, जिसमें आदेश है कि विपक्षी द्वारा दायर शिकायत को खारिज कर दिया गया, जबकि उसी शिकायत में 13 फरवरी को ही एक और आदेश की प्रमाणित प्रति है, जिसमें आवेदक को मुकदमे का सामना करने के लिए बुलाया गया है। इसलिए तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर- पांच के संदीप सिंह को निर्देश दिया जाता है कि संबंधित जिला न्यायाधीश को सूचित करते हुए एक ही शिकायत मामले में एक ही तारीख के दो विपरीत आदेशों के अस्तित्व के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए अगली तारीख तक इस न्यायालय के समक्ष अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करें।